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الجمعة، 12 سبتمبر 2025

सोनिया गांधी के नागरिकता विवाद पर अदालत का निर्णय:नागरिकता और मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के पास


- दिल्ली की अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका  खारिज
- भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले 1980  मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराया।
- शिकायत असंगत और अपर्याप्त  कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग 
- नागरिकता और मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के पास 
- सोनिया गांधी के खिलाफ  कार्रवाई से इनकार 
कानपुर :11 सितम्बर, 2025
नई दिल्ली :11 सितम्बर, 2025 दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर विचार करके भारत के चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं कर सकती। सोनिया गांधी ने कथित तौर पर भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पहले 1980 की मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाया था।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने हाल ही में सोनिया गांधी के खिलाफ की गई याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया था कि उनका नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया था। इस मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि सोनीया गांधी का नाम जनवरी 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने नागरिकता केवल अप्रैल 1983 में प्राप्त की थी.
कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण होगा। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के पास है. अदालत ने शिकायत को असंगत और अपर्याप्त बताया और कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है.
शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने यह भी आरोप लगाया कि 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, लेकिन 1983 में पुनः जोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया संदिग्ध है और इसमें जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया हो सकता है. हालांकि, अदालत ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि यह मामले केवल चुनाव आयोग और केंद्र सरकार द्वारा तय किए जा सकते हैं.
 कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया और आरोपों को निराधार मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया.

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