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'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' बिना बहस के ध्वनि मत से पारित

'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' बिना किसी बहस के ध्वनि मत से पारित
उद्देश्य अधिनियम 1969 में संशोधन कर पंजीकरण को पारदर्शी, समयबद्ध और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक
"कार्यकारी मजिस्ट्रेट" शब्द को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के साथ संरेखित
कानपुर: 31 जुलाई 2026
नई दिल्ली: 31 जुलाई 2026
संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार, 31 जुलाई, 2026 को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' बिना किसी बहस के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1969 के मूल अधिनियम में संशोधन कर पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध बनाना और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है.
विधेयक के पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इस रवैये पर गहरी नाराजगी जताई.
विधेयक के तहत नियमों में किए गए प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
देरी से पंजीकरण के कड़े नियम
1 से 2 साल की देरी: यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर कराया जाता है, तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), एसडीएम (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही पंजीकरण संभव होगा. यह व्यवस्था पुराने कानून की तरह ही जारी रहेगी.
2 साल से अधिक की देरी: यदि पंजीकरण में दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, तो अब प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय सीधे प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश लेना अनिवार्य होगा. इससे सत्यापन प्रक्रिया अधिक सख्त हो जाएगी.
कानूनी परिभाषाओं में बदलाव: नए विधेयक में कानूनी परिभाषाओं को अपडेट किया गया है, जिसके तहत "कार्यकारी मजिस्ट्रेट" शब्द को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के साथ संरेखित किया गया है. इसने 1973 के पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के संदर्भों को बदल दिया है.
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
यह विधेयक 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और केंद्रीय कैबिनेट ने इसे 20 जुलाई, 2026 को मंजूरी दी थी. लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक मंजूरी के लिए राज्यसभा भेजा जाएगा

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