लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए नई रणनीतिक चुनौती
भारत से दूरी: होतान एयरबेस (शिनजियांग): उत्तरी लद्दाख से 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी
डामशुंग एयरबेस (तिब्बत): अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर से करीब 344 किमीकानपुर: 31 जुलाई 2026
अरुणाचल: 31 जुलाई 2026
अमेरिकी कमर्शियल सैटेलाइट कंपनी Vantor की हालिया तस्वीरों के अनुसार, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपने दो प्रमुख एयरबेस पर कम से कम 11 से 12 J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत की उत्तरी सीमा के सामने इतनी बड़ी संख्या में चीन के इन पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी पहली बार देखी गई है। यह कदम लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती पेश करता है।
एयरबेस और भारत से उनकी दूरी
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह तैनाती मुख्य रूप से दो रणनीतिक हवाई पट्टियों पर की गई है:होतान एयरबेस (शिनजियांग): इस बेस के रनवे पर कुल 8 J-20 विमान खड़े देखे गए हैं। यह बेस उत्तरी लद्दाख में भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी (DBO) एयरफील्ड से केवल 245 किमी और लेह से लगभग 389 किमी दूर है।
डामशुंग एयरबेस (तिब्बत): ल्हासा क्षेत्र में स्थित इस ऊंचाई वाले बेस पर सुरक्षात्मक शेल्टर के नीचे 4 J-20 विमान तैनात मिले हैं। यह बेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर से करीब 344 किमी की दूरी पर है।
इस तैनाती का रणनीतिक महत्वनियमित ऑपरेशनल हिस्सा: रक्षा सूत्रों के मुताबिक, पहले चीन इन विमानों को केवल युद्धाभ्यास या शक्ति प्रदर्शन के लिए लाता था। लेकिन ऊंचाई वाले ठिकानों पर इनकी निरंतर मौजूदगी दर्शाती है कि चीन इन्हें अब अपनी नियमित युद्ध रणनीति का हिस्सा बना चुका है।
दोतरफा दबाव: एक साथ लद्दाख (पश्चिमी सेक्टर) और तिब्बत (पूर्वी सेक्टर) के सामने तैनाती करके चीन भारत के दोनों सबसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों पर एक समान दबाव बना रहा है।
बुनियादी ढांचे का विकास: 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से चीन ने एलएसी के पास न केवल लड़ाकू विमान बढ़ाए हैं, बल्कि नए रनवे, मिसाइल यूनिट्स और मजबूत रडार नेटवर्क भी तैयार किए हैं।
J-20 की तकनीकी क्षमताएंस्टील्थ तकनीक: यह चीन का सबसे उन्नत फाइटर जेट है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से न आए।
हथियार प्रणाली: यह विमान अत्याधुनिक एईएसए (AESA) रडार और लंबी दूरी की पीएल-15 (PL-15) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है।
भारत की स्थिति और जवाबी तैयारी
भारतीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि स्टील्थ होने का मतलब पूरी तरह से अदृश्य होना नहीं है। भारतीय वायुसेना के Su-30MKI विमानों ने 2018 में ही चीन के J-20 को अपने रडार पर डिटेक्ट (पहचान) कर लिया था। इस चीनी चुनौती से निपटने के लिए भारत सीमा पर अपने राफेल (Rafale) लड़ाकू विमानों, सुखोई (Su-30MKI) और रूस से मिले S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के जरिए बेहद मजबूत हवाई निगरानी और सुरक्षा कवच बनाए हुए है। हालांकि, वायुसेना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या को देखते हुए इस नई तैनाती पर भारतीय सैन्य कमांडर लगातार नजर रख रहे हैं।




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