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पटना हाई कोर्ट: स्टेट बैंक अधिकारी पंकज कुमार सिंह की नौकरी बहाल करने का ऐतिहासिक आदेश

बैंक अधिकारी की बीमारी के कारण लंबी अनुपस्थिति को "स्वेच्छा से इस्तीफा"
"कोई भी कर्मचारी गुलाम नहीं होता है"।
बीमारी में मजबूरी में ड्यूटी पर आना: स्वेच्छा से नौकरी छोड़ना: काम परित्याग नहीं माना जा सकता।

कानपुर: 13 सितम्बर 2026
पटना: 13 सितम्बर 2026

न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि "कोई भी कर्मचारी गुलाम नहीं होता है"। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमारी के कारण मजबूरी में ड्यूटी पर न आ पाना स्वेच्छा से नौकरी छोड़ना या काम का परित्याग करना नहीं माना जा सकता।
मामले के मुख्य बिंदु और कोर्ट का फैसला:
गंभीर बीमारी: साल 2019 में बेतिया ट्रांसफर के दौरान वह पीलिया (Jaundice) और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो गए, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहना पड़ा। उन्होंने समय-समय पर अपने मेडिकल दस्तावेज भी बैंक को भेजे थे।
बैंक का मनमाना रवैया: जब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर 16 दिसंबर 2019 को ड्यूटी पर लौटे, तो उन्हें पता चला कि बैंक ने 7 दिसंबर 2019 से ही उनकी अनुपस्थिति को अनधिकृत मानते हुए उन्हें सेवामुक्त घोषित कर दिया था।
अदालत का आदेश: कोर्ट ने बैंक द्वारा जारी सभी नोटिस और अपीलीय आदेशों को रद्द करते हुए अधिकारी को 'सेवा की निरंतरता' (Continuity of Service) और अन्य संबद्ध लाभों के साथ तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। हालांकि, जितने समय उन्होंने काम नहीं किया, उतने दिनों का बैक-पे (वेतन या भत्ता) उन्हें नहीं मिलेगा, लेकिन वह अवधि उनकी कुल सेवा में जोड़ी जाएगी।
30 साल की बेदाग सेवा: अधिकारी पंकज कुमार सिंह 1989 से बैंक में कार्यरत थे और वर्तमान में डिप्टी मैनेजर के पद पर थे। उनके पूरे करियर में कभी कोई शिकायत नहीं रही।
कोर्ट ने बैंक को कर्मचारी की नौकरी बहाल करने का आदेश दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमारी के कारण अनुपस्थिति को इस्तीफा नहीं माना जा सकता. पटनाः पटना उच्च न्यायालय ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक अधिकारी को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने एसबीआई के उस फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है.पटना हाई कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक अधिकारी पंकज कुमार सिंह की नौकरी बहाल करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। बैंक ने अधिकारी की बीमारी के कारण लंबी अनुपस्थिति को "स्वेच्छा से इस्तीफा" (Voluntary Resignation) मानकर उन्हें सेवामुक्त कर दिया था, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।

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