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कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 2027 विधानसभा के लिए वाराणसी की पिंडरा विधानसभा लड़ने का किया ऐलान

मछलीशहर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक
अजय राय यहाँ से 5 बार विधायक रह चुके हैं.
उनका पारंपरिक गृह क्षेत्र और पुराना राजनीतिक गढ़ 
वर्तमान में BJP  के अवधेश कुमार सिंह विधायक 
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में BSP  प्रत्याशी बाबूलाल को 35,559 वोटों से हराकर  दूसरी  जीत दर्ज की
कानपुर: 5 सितम्बर 2026
वाराणसी: 5 सितम्बर 2026
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने इस सीट को इसलिए चुना क्योंकि यह उनका पारंपरिक गृह क्षेत्र और पुराना राजनीतिक गढ़ है.
पिंडरा विधानसभा सीट (सीट नंबर 384) उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित एक प्रमुख और हाई-प्रोफाइल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है. यह निर्वाचन क्षेत्र मछलीशहर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. [
यह सीट वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी, जिसे पहले 'कोलसला' विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था. 
वर्तमान राजनीतिक स्थिति और इतिहासवर्तमान विधायक: वर्तमान में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अवधेश कुमार सिंह विधायक हैं. उन्होंने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रत्याशी बाबूलाल को 35,559 वोटों के अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी. 
अजय राय का प्रभाव: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष अजय राय इस क्षेत्र से 5 बार विधायक रह चुके हैं. वह यहां से भाजपा, निर्दलीय और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं.
आगामी चुनाव (2027): कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पिंडरा सीट से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे यह सीट आगामी चुनावों के लिए बेहद चर्चित हो गई है
अजय राय ने पिंडरा सीट को ही क्यों चुना?
पारंपरिक गढ़: अजय राय यहाँ से 5 बार विधायक रह चुके हैं.
जमीनी पकड़: स्थानीय कार्यकर्ताओं में उनकी मजबूत पैठ है.
घर-घर पहचान: क्षेत्र की जनता से उनका सीधा जुड़ाव है.
पिंडरा सीट का राजनीतिक समीकरण: 
पिंडरा (पूर्व में कोलअसला) सीट का सियासी समीकरण काफी दिलचस्प है: गठबंधन की ताकत: वह सपा-कांग्रेस गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी होंगे.
जातीय समीकरण: यहाँ दलित और कुर्मी मतदाता बेहद निर्णायक हैं.
बड़ी चुनौती: भूमिहार और ब्राह्मण वोटों को सहेजना आवश्यक होगा.
बसपा का प्रभाव: जीत के लिए दलित वोटों को साधना जरूरी है.
स्थानीय नाराजगी: विकास कार्य पूरे न होने से जनता में असंतोष है.
भाजपा का कब्जा: पिछले दो चुनावों से यहाँ भाजपा जीत रही है.
भीतरी कलह: भाजपा के आंतरिक विरोध का उन्हें लाभ मिल सकता है
घरेलू जुड़ाव: वाराणसी और पिंडरा उनका अपना घर है.

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