अगले 2-3 महीनों में यहां बुनियादी और जमीन पर दिखने वाले सुधार जरूर शुरू हो जाएंगे।
"मेरे MLA बनने से बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन दो-तीन महीनों में कुछ सुधार देखेंगे।"
सरकारें मुफ़्त राशन और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर बच्चों की शिक्षा और रोज़गार के लिए काम करें।"
"मेरे MLA बनने से बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन दो-तीन महीनों में कुछ सुधार देखेंगे।"
सरकारें मुफ़्त राशन और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर बच्चों की शिक्षा और रोज़गार के लिए काम करें।"
कानपुर: 3 अगस्त 2026
बांकीपुर: 3 अगस्त 2026
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का यह प्रसिद्ध बयान है। उन्होंने यह बात 3 अगस्त 2026 को बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कही थी। बयान का मुख्य संदर्भ और बड़ी बातें:जीत की प्राथमिकता: प्रशांत किशोर ने भाजपा (BJP) के तीन दशक पुराने इस मजबूत गढ़ में जीत हासिल की। चुनावी नतीजे आने के बाद उन्होंने कहा कि वह कोई बड़े-बड़े या खोखले वादे नहीं करना चाहते।
बदलाव का भरोसा: उन्होंने बांकीपुर की जनता को आश्वस्त किया कि भले ही क्षेत्र रातों-रात बेंगलुरु जैसा हाई-टेक या विकसित शहर न बने, लेकिन अगले 2-3 महीनों में यहां बुनियादी और जमीन पर दिखने वाले सुधार जरूर शुरू हो जाएंगे।
बिहार के नेतृत्व पर संदेश: अपने इस भाषण में उन्होंने आगे कहा कि यह चुनाव सिर्फ बांकीपुर की नाली-गली या स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि इस बात पर लड़ा गया था कि बिहार का नेतृत्व किसके हाथ में होना चाहिए। उन्होंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दिया कि वे बिहार में किसी अच्छे और काबिल चेहरे को मुख्यमंत्री बनाएं।इससे पहले दिन में, किशोर ने बांकीपुर के लोगों का उन पर भरोसा जताने के लिए शुक्रिया अदा किया और बड़े-बड़े वादे करने के बजाय विकास पर ध्यान देने का वादा किया।
उन्होंने कहा, "मेरे MLA बनने से बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा, लेकिन आप अगले दो-तीन महीनों में यहां कुछ सुधार देखेंगे।"
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि लोग उनके काम से उन्हें परखें, किशोर ने कहा, "मेरा पहला काम लोगों के आशीर्वाद से बांकीपुर को बेहतर बनाना होगा। आप अगले दो-तीन महीनों में बदलाव देखेंगे। मैं बड़ी-बड़ी बातें नहीं करना चाहता।"
'30 साल का किला ढह गया'
इस नतीजे को "30 साल के किले" के ढहने जैसा बताते हुए किशोर ने कहा कि यह फ़ैसला शिक्षा, रोज़गार और विकास पर केंद्रित राजनीति के लिए बिहार की इच्छा को दिखाता है।
उन्होंने कहा, "30 साल का किला सिर्फ़ 30 दिनों में ढह गया। यह इसलिए ढहा क्योंकि बिहार के लोग अब चाहते हैं कि सरकारें चार-पांच किलो मुफ़्त राशन और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर उनके बच्चों की शिक्षा और रोज़गार के लिए काम करें।"




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