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السبت، 5 أبريل 2025

चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी 5 अप्रैल 2025 को मनाई जा रही है कन्या पूजन का महत्व

 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा
महागौरी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण देवी दुर्गा माता के नौ रूपों में से एक
अष्टमी का व्रत रखा जाता है


कानपुर 5, अप्रैल, 2025
चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर कन्या पूजन का महत्व अत्यधिक है।महाअष्टमी 5 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप, महागौरी की पूजा की जाती है। कन्या पूजन इस दिन का एक विशेष अनुष्ठान है, जहाँ भक्त नौ कन्याओं की पूजा करते हैं, जिन्हें देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है।
महागौरी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण देवी दुर्गा माता के नौ रूपों में से एक हैं। उन्हें शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है। महागौरी का वर्णन अक्सर एक सुंदर, गोरी और युवा महिला के रूप में किया जाता है, जो सफेद वस्त्र पहनती हैं और उनके हाथ में त्रिशूल और डमरू होता है। उनकी उपासना से भक्तों को साधना, समर्पण और आत्मा की शुद्धि की प्राप्ति होती है। महागौरी की विशेष पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान की जाती है!
नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दिन देवी मां की विशेष पूजा की जाती है और अष्टमी का व्रत रखा जाता है. चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी या दुर्गाष्टमी का कन्या पूजन 5 अप्रैल को मनाई जा जा रही है
शुभ मुहूर्त
महाअष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा।
पूजा विधि
कन्याओं का आमंत्रण: कन्याओं को सम्मान के साथ घर बुलाएं।
पैर धोना: उनके घर आने पर, पहले उनके हाथ और पैरों को दूध या पानी से धोएं।
आसन: कन्याओं को स्वच्छ और आरामदायक जगह पर बिठाएं।
तिलक और भोग: उनके माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाएं। फिर मां भगवती का ध्यान करके देवी रूपी कन्याओं को इच्छानुसार भोजन कराएं।
उपहार: भोजन के बाद उन्हें उपहार दें और विदाई के समय उनका पांव छूकर आशीर्वाद लें।
कन्या पूजन का महत्व
कन्या पूजन के दौरान, भक्त न केवल देवी दुर्गा का सम्मान करते हैं बल्कि कन्याओं की शक्ति का भी आभास कराते हैं। यह माना जाता है कि कन्याओं की पूजा से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।महाअष्टमी का पर्व विशेष रूप से कन्या पूजन के माध्यम से श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शक्ति का संचार करता है।

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