भोपाल: गोरखपुर में कार्बाइड और अस्थायी विस्फोटकों के कारण बच्चों की आंखों को गंभीर नुकसान: समय पर सही इलाज नही तो अंधापन

सोशल मीडिया पर वीडियो से सस्ते में कार्बाइड बंदूकों से बच्चों की आंखों की रोशनी संकट
कॉर्निया की चोट, आंख के टिश्यू में छर्रे लगना, रेटिना की क्षति और गंभीर संक्रमण
झुलसी आंखों का इलाज कराने करीब 25 बच्चे बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स पहुंचे
कार्बाइड की बाजार कीमत 160 रुपए किलो

कानपुर:23 अक्टूबर
भोपाल: गोरखपुर:23 अक्टूबर: मध्य प्रदेश में कार्बाइड बंदूकों और अस्थायी विस्फोटकों के कारण बच्चों की आंखों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। अधिकारियों के अनुसार, इस साल दिवाली के दौरान, कम से कम 14 बच्चों की दृष्टि स्थायी रूप से चली गई है और तीन दिनों में 122 से अधिक बच्चों की आंखों को नुकसान पहुँचा है।
भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में, स्वास्थ्य अधिकारियों ने 300 से अधिक मामलों की रिपोर्ट की है। इनमें से 186 मामले सिर्फ भोपाल से हैं, जिनमें कॉर्नियल जलन और रेटिना की चोटें शामिल हैं। शाजापुर में, एक 14 वर्षीय लड़के अजय ने घर पर बनाए कैल्शियम कार्बाइड पटाखे से गंभीर चोट पाई, जिससे उसकी आंख की रोशनी जा चुकी है। इसी तरह की घटनाएँ विदिशा और अन्य स्थानों पर भी दर्ज की गई हैं, जहाँ लगभग 20 बच्चों को इसी प्रकार की समस्याओं के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया。
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में कॉर्निया की चोट, आंख के टिश्यू में छर्रे लगना, रेटिना की क्षति और गंभीर संक्रमण जैसी जोखिम भरी स्थितियाँ हो सकती हैं। यदि समय पर सही इलाज न किया गया तो यह स्थायी दृष्टि हानि या अंधापन का कारण बन सकता है।
दीपावली पर कई परिवारों की खुशियां छिन गईं. सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर सस्ते में कार्बाइड बम बनाने वाले कई बच्चों की आंखों की रोशनी पर संकट आ गया है. गंभीर रूप से झुलसी आंखों का इलाज कराने करीब 25 बच्चे बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स में पहुंचे हैं.
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के प्राचार्य और नेत्र सर्जन डॉ. रामकुमार जायसवाल मरीजों को ओपीडी में खुद भी देखें हैं. उन्होंने कहा कि यूट्यूब से ज्ञान लेकर सस्ता बम बनाने के चक्कर में बच्चों ने कार्बाइड बम से अपने आंखों को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. कईयों के चेहरे झुलस गए हैं और आंख में गंभीर चोट आई है. कार्निया प्रत्यारोपण की भी नौबत आ सकती है. जिन लोगों ने मेडिकल कॉलेज आने से पहले इधर-उधर इलाज कराया है, उनकी आंखों में और दिक्कत है.
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कुशीनगर के कसया के रहने वाले सिराज अंसारी (14) की आंख में चोट पहुंची है. 11 वर्षीय अंतस की पुतली चोटिल हो गईं है और दोनों पलक और चेहरा भी जला है. जिसमें आंख की रोशनी जाने के प्रमाण मिल रहे हैं, क्योंकि पुतली सफेद हो चुकी है. अंतस के परिजनों ने बताया कि वह कार्बाइड बम घर में बना रहा था. इस दौरान विस्फोट होने से आंख में चोट लगी और चेहरा भी जल गया.डॉ. रामकुमार ने बताया कि कार्बाइड बम भले ही सस्ता है लेकिन इसकी वजह से लोग अंधेपन के शिकार हो सकते हैं. प्लास्टिक की बोतल या पाइप में बाजार से कार्बाइड खरीद कर लाकर पानी और रसोई गैस लाइटर की सहायता से बम बनाने की जो प्रक्रिया हुई, उसमें विस्फोट होने से घटनाएं हुई हैं. उन्होंने बताया कैल्शियम कार्बाइड में जैसे ही पानी मिलाया जाता है, उसमें एसिटिलीन गैस बनने लगती है. इस गैस में छोटी सी चिंगारी से धमाका होता है. चिंगारी देने का काम रसोई गैस लाइटर से किया जा रहा था. इस दौरान अगर प्लास्टिक कमजोर है तो धमाके के साथ तो वह भी फट जाता है. जिससे उससे निकलने वाले छोटे-छोटे कण और कार्बाइड सीधे आंख में जा पहुंचते हैं. यह आंखों की रोशनी छीनने का कारण बन जाते हैं.
करीब 100 रुपये में घर पर बम बना लेने की लालच और सोशल मीडिया के ज्ञान ने इनके लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी है. कार्बाइड की बाजार कीमत 160 रुपए किलो है. इसके इस्तेमाल से पटाखे की हजारों आवाज तैयार हो सकती है. बच्चे इसे बोतल में भरकर बम बनाने का काम कर रहे थे. जिससे दीपावली में वह इसके शिकार हो गए. डॉ. रामकुमार ने बताया कि कहा कि इस घटना से समाज के लोग सीख लें. अभिभावक भी जागरूक हो जाएं और अपने बच्चों की आंखों की रोशनी को जाने से बचा लें. नहीं तो यह सस्ता बम लोगों के लिए घातक हो सकता है.
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों को पटाखों से दूर रखने और सुरक्षित पटाखों का उपयोग करने की सलाह दी है। कार्बाइड गन जैसी खतरनाक सामग्री को बच्चों के हाथों से दूर रखने की भी आवश्यकता है। अभिभावकों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने बच्चों को इन खतरनाक खिलौनों से दूर रखें और उन्हें इसके खतरों के बारे में जागरूक करें।
घटनाएँ बच्चों की स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा व समाज और सरकार के लिए चिंता का विषय है। इसलिए कार्बाइड गन जैसे सभी खतरनाक सामानों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ।
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