सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया विमान दुर्घटना में पायलट को दोषी ठहराने के खिलाफ की महत्वपूर्ण टिप्पणी ...

• सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच का उद्देश्य दोषी ठहराना बल्कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाना
• अहमदाबाद से लंदन एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 की दुर्घटना 12 जून 2025 को हुई थी
• पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और प्रारंभिक रिपोर्ट में भी खिलाफ कोई संकेत नहीं
• जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है,
• निर्णय पायलट के प्रति न्यायसंगत और संपूर्ण विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों को सुधारने का प्रयास

कानपुर 13 नवंबर 2025
नई दिल्ली: 13 नवंबर 2025:सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एयर इंडिया विमान दुर्घटना में पायलट को दोषी ठहराने के खिलाफ महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि जांच का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि दुर्घटना का कारण क्या था ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
यह विमान दुर्घटना 12 जून 2025 को हुई, जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद से लंदन जा रही थी। उड़ान भरने के तुरंत बाद ही विमान एक इमारत से टकरा गया, जिससे 260 लोगों की मौत हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि टेकऑफ़ के कुछ सेकंड बाद, विमान के ईंधन सप्लाई स्विच "कटऑफ" स्थिति में आ गए थे, जिससे दुर्घटना हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने पायलट सुमीत सभरवाल के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि पायलट को किसी भी प्रकार से दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है,  आपको यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि आपके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट के खिलाफ कोई संकेत नहीं है।
अभी यह जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है। पायलट के पिता और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एक स्वतंत्र जांच की मांग की है, यह देखते हुए कि मौजूदा जांच निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल पायलट के प्रति न्यायसंगत है, बल्कि यह संपूर्ण विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों को सुधारने का प्रयास भी दर्शाता है। अदालत ने कहा कि जांच में उचित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है, और यह जरूरी है कि हादसे के कारणों की व्यापक और निष्पक्ष जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जा सकें।
महत्वपूर्ण संदेश यह है कि विमानन सुरक्षा प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता अनिवार्य है ताकि इसी तरह की घटनाओं की फिर से पुनरावृत्ति न हो सके।
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