सशस्त्र नक्सलवाद खत्म: 'दिमागी नक्सल' व्यवस्था और समाज में अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं
यह शब्द उन लोगों के लिए था जो माओवादियों के समर्थक हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते।कानपुर:16अगस्त 2026
नई दिल्ली: 16 अगस्त 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर एक सीधा पलटवार है। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लिखा, “मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है!”
इस पूरे विवाद और बयान की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:बयान की वजह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में 'दिमागी नक्सल' (वैचारिक नक्सलवाद) शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद तो खत्म हो रहा है, लेकिन 'दिमागी नक्सल' व्यवस्था और समाज में अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं, जिन्हें पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है
चिदंबरम का पलटवार: पीएम के इस बयान पर तंज कसते हुए चिदंबरम ने खुद को 'दिमागी नक्सल' बताया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले और सामाजिक न्याय या जातिगत जनगणना की मांग करने वाले आलोचकों को निशाना बनाने के लिए ऐसे लेबल दिए जाते हैं।
सरकार का रुख: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि पीएम मोदी ने विपक्ष के नेताओं को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा था。 यह शब्द उन लोगों के लिए था जो माओवादियों के समर्थक हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते।




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