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उत्तराखंड:चमोली: अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम भारी भूस्खलन, मलबे और पानी के तेज रिसाव के कारण दर्दनाक हादसा

घायल 10 श्रमिकों को बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया
सुरंग के भीतर अचानक मलबे और दलदल के आ जाने से वहां काम कर रहे श्रमिक चपेट में आ गए
सुरंग के अंदर फंसे 6 अन्य श्रमिकों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।


कानपुर:14 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 14 अगस्त 2026 
उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग (Tail Race Tunnel) में गुरुवार शाम भारी भूस्खलन, मलबे और पानी के तेज रिसाव के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ है।
सुरंग के भीतर अचानक मलबे और दलदल के आ जाने से वहां काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। इस भीषण हादसे से जुड़ी मुख्य जानकारियां और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
रेस्क्यू ऑपरेशन और हताहतों का विवरणश्रमिकों की मौत: मलबे से अब तक 9 श्रमिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
लापता लोगों की खोज: सुरंग के अंदर फंसे 6 अन्य श्रमिकों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।
घायलों का उपचार: हादसे में घायल हुए 10 श्रमिकों को तुरंत बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों (जैसे जिला अस्पताल गोपेश्वर) में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
बचाव दल: मौके पर NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस की टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ राहत कार्य में जुटी हुई हैं।
रेस्क्यू में आ रही चुनौतियां
दलदल और पानी का रिसाव: टनल के भीतर भारी मात्रा में मलबा, कीचड़ और पानी लगातार बढ़ रहा है, जिससे बचाव दल को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है।
ऑक्सीजन की कमी: सुरंग के गहरे हिस्से में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण भी रेस्क्यू ऑपरेशन बार-बार बाधित हो रहा है।
मशीनरी का फंसना: मलबे को हटाने के लिए टनल के अंदर भेजी गई हैवी लोडर मशीनें भी कीचड़ में फंसकर क्षतिग्रस्त हुई हैं।
शासन और प्रशासन की कार्रवाई उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस पूरे घटनाक्रम और रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन को युद्धस्तर पर काम करने और सुरंग में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधन झोंकने के निर्देश दिए हैं।
यह परियोजना टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC) की है और इसका निर्माण कार्य हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) द्वारा किया जा रहा था, जो अब जांच के घेरे में है

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