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السبت، 14 ديسمبر 2024

सरकार को चेतावनी किसान आंदोलन के दौरान बल प्रयोग न करे , चिकित्सा सहायता प्रदान करे। शांतिपूर्वक किसान आंदोलन गलत नहीं है सुप्रीम कोर्ट

  • सरकार किसान आंदोलन के दौरान बल प्रयोग न करे
  • किसानो को चिकित्सा सहायता प्रदान करे
  • शांतिपूर्वक किसान आंदोलन गलत नहीं सुप्रीम कोर्ट 
  • शंभू बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत
  • छोड़े गए आंसू गैस के गोले; कई किसान घायल
  • अंतरराज्यीय सीमा घग्गर नाले पर  केंद्रीय अर्धसैनिक बल और हरियाणा पुलिस तैनात
नई दिल्ली, 14 दिसंबर 2024

 किसानों का शंभू बॉर्डर से दिल्ली  मार्च पर हरियाणा पुलिस और किसानों में बहस शुरु,अंबाला DC और SP बोले- हाई पावर कमेटी से मीटिंग करवा देंगे.
भारत में किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर लाठियों और आसू गैस के गोले छोडे जा रहे है । हैं। सरकार  किसानों के हक की आवाज़ उठाने वाले आंदोलनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है।

हरियाणा और पंजाब के किसानों ने अपने हक की मांग को लेकर कई स्तरों पर प्रदर्शन किया है। किसानों की मांगें मुख्य रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और भूमि अधिग्रहण कानून की पुनर्स्थापना से जुड़ी हैं
किसानों के पैदल मार्च के संदर्भ में घग्गर नाले पर अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। इस सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और हरियाणा पुलिस बलों को तैनात किया गया है। इसका उद्देश्य किसान आंदोलन को नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और अप्रिय घटना से बचा जा सके। सरकार किसान आंदोलन की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रही है और सुरक्षा के सभी आवश्यक उपाय कर रही है।यह तैयारियाँ किसानों के प्रदर्शन को दबाने का प्रयास है ।
जब किसानों ने खनौरी बॉर्डर की ओर बढ़ने का प्रयास किया पुलिस ने किसानों के ट्रैक्टरों की हवा निकाल दी और बल प्रयोग को जारी रखा, तो पुलिस ने लाठियाँ भांजी और आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई में कई किसान घायल हो गए।
किसान नेता राकेश टिकैत और अन्य के अनुसार सरकार केवल पूंजीपतियों की हितों की रक्षा कर रही है और किसान कल्याण के बारे में पूरी तरह से विफल हैं[
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि किसानों के अधिकारों की अवहेलना करना उनकी स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए खतरा है[
सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि बल प्रयोग न किया जाए, और किसान नेताओं को चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। कोर्ट का कहना है कि किसान आंदोलन का शांतिपूर्वक होना गलत नहीं है[
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत दे रहा है कि किसान आंदोलन समाप्ति की ओर नहीं बढ़ रहा है और इससे जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए एक ठोस और प्रभावशाली सरकारी नीति की आवश्यकता है। 

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