2. तत्काल आवश्यकता
3. संवैधानिक या कानूनी शून्यता
डा. लोकेश शुक्ल कानपुर 9450125954
भारतीय संविधान में प्रदत्त राष्ट्रपति को अधिकार और शक्तियाँ सदन की कार्यवाही के दौरान कानून के रूप में अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की है। अध्यादेश एक प्रकार का अस्थायी कानून होता है, जिसे राष्ट्रपति विशेष परिस्थितियों में तुरंत लागू करने के लिए जारी कर सकते हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत, राष्ट्रपति को किसी विषय पर अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। यह तब आवश्यक होता है जब संसद की बैठक न हो और तत्काल कार्यवाही की आवश्यकता होती है। अध्यादेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सकता है, लेकिन इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित करना आवश्यक है, ताकि वह विधि का स्वरूप प्राप्त कर सके।
राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी करने की स्थिति
1. संसद का सत्र न होना
राष्ट्रपति आमतौर पर तब अध्यादेश जारी करते हैं जब संसद का कोई सत्र नहीं चल रहा होता है। इस स्थिति में, कोई भी विधेयक पारित नहीं हो सकता, और यदि कोई आपातकालीन आवश्यकता है, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करने के लिए अधिकृत होते हैं।
2. तत्काल आवश्यकता
किसी मौजूदा कानूनी ढांचे में तत्काल संशोधन की आवश्यकता या नये कानून की अनिवार्यता होती है, तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब सरकार को लगता है कि मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे तुरंत सुलझाना आवश्यक है।
3. संवैधानिक या कानूनी शून्यता
संविधान या अन्य कानूनों में ऐसे प्रावधान होते हैं जिनका तात्कालिक प्रभाव नहीं होता। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति अध्यादेश के माध्यम से उस शून्यता को भर सकते हैं और आवश्यक विधायी व्यवस्था कर सकते हैं।
अध्यादेश का प्रक्रिया
राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश उसी दिन से प्रभावी होता है जब इसे जारी किया गया है। इसके लिए राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, अध्यादेश का निर्माण पूरी तरह से सरकार की सलाह पर निर्भर करता है। राष्ट्रपति के पास यह विवेकाधिकार नहीं है कि वे बिना मंत्रिमंडल के सलाह के अध्यादेश जारी कर सकें।
संसद का अगला सत्र प्रारंभ होने पर अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यदि संसद अध्यादेश का अनुमोदन करती है, तो वह विधि के रूप में लागू हो जाता है। यदि संसद द्वारा इसे अस्वीकृत किया जाता है, तो अध्यादेश समाप्त हो जाता है। अध्यादेश का अधिकतम कार्यकाल छह महीने होता है, और यदि इसे इस अवधि के भीतर अनुमोदित नहीं किया गया, तो यह स्वतः समाप्त हो जाता है।
अध्यादेशों की सीमाएँ
राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का दुरुपयोग न हो, इसके लिए कुछ सीमाएँ भी निर्धारित की गई हैं। अध्यादेश केवल तब जारी किया जा सकता है जब विधानसभाएँ नहीं बैठी हों और संसद के सामने प्रस्तुत किए जाने के लिए यह आवश्यक हो। इसके अलावा, अध्यादेश केवल संसद के क्षेत्राधिकार के विषयों पर जारी किए जा सकते ।
अध्यादेश जारी करने की प्रक्रिया में तात्कालिकता और प्रभावशीलता होती है। इससे सरकार को तत्काल कदम उठाने और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की क्षमता मिलती है। विभिन्न आपात स्थितियों में, जैसे कि आपदा प्रबंधन, वित्तीय संकट, या सामाजिक मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई के लिए अध्यादेश अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
राष्ट्रपति अध्यादेश जारी करने का अधिकार भारतीय संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंश है। यह प्रक्रिया सरकार को आवश्यक कानूनी परिवर्तनों को लागू करने की तात्कालिक शक्ति प्रदान करती है, जिससे लोकतांत्रिक संचालन सुचारु बना रहता है। इस अधिकार का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से होना चाहिए, ताकि लोकतंत्र के मूल्यों और संविधानिक प्रावधानों का पालन किया जा सके। अध्यादेश की प्रकृति, प्रक्रिया, और सीमाओं का उचित ज्ञान होना आवश्यक है, ताकि कानूनों और नीतियों के निर्माण में संतुलन बना रहे।




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