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السبت، 11 يناير 2025

यूपी सरकार को ज़ारी नोटिस संभल जामा मस्जिद के कुएं को 'हरि मंदिर' बताने और उसके पास पूजा की इजाजत दिए जाने के आदेश पर सुप्रीमकोर्ट ने लगाई रोक

 संभल जामा मस्जिद के पास कुएं की पूजा करने पर रोक

अन्य व्यक्ति कुएं का सार्वजनिक उपयोग करना चाहता है, तो मना नहीं मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार
अगली सुनवाई 21 फरवरी को


कानपुर:11 जनवरी, 2024
नई दिल्ली 11 जनवरी, 2024 सुप्रीम कोर्ट ने संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद के पास के कुएं को 'हरि मंदिर' बताने और उसके पास पूजा की अनुमति दिए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है।नगर पालिका ने इसे सार्वजनिक कुआं बताया था संभल की शाही जामा मस्जिद कमेटी ने इस संदर्भ में याचिका 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट मे दायर की थी, जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर स्थिति रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है।जिसमें कुएं से संबंधित सभी जानकारियाँ शामिल होंगी। मामले मेंं अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य व्यक्ति कुएं का सार्वजनिक उपयोग करना चाहता है, तो उसे मना नहीं किया जाएगा।


पुर्व मे निकट निवास करने वाले हिंदू समुदाय के लोग शादी में कुआं पूजन करने आते थे । इस समय संभल में प्रशासन जगह-जगह खुदाई करा रहा है। इस बीच नगर पालिका ने इस कुएं को सार्वजनिक बता दिया, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष को आशंका हुई कि कहीं इस कुएं को भी न खोद दिया जाए।सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि कुएं की पूजा करने की अनुमति देने वाले नगरपालिका के नोटिस पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि इस कुएं को 'हरि मंदिर का कुआं' बताने के प्रयासों पर रोक लगी रहेगी और भविष्य में किसी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह कुआं पूजा का स्थल रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस कुएं को मस्जिद का हिस्सा मानता है। जामा मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि कुएं के बारे में दी गई सूचना से वहाँ पूजा शुरू किया जा सकता है, जिससे सामुदायिक तनाव पैदा हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि बिना अनुमति के कुएं के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह परिवाद धार्मिक मुद्दों को उजागर करता है और सामाजिक सामंजस्य को बनाए रखने के लिए कानूनी उपायों की आवश्यकता प्रख्यापित करता है ।

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