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الخميس، 5 ديسمبر 2024

भारत की जीडीपी वृद्धि वित्तीय वर्ष 2025 में 7% रहने का पूर्वानुमान विश्व बैंक

 अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल बाहरी ऋण 2023 में 31 अरब डॉलर बढ़कर 646.79 अरब डॉलर विश्व बैंक  ।
नई दिल्ली:04 दिसंबर 2024, 

विश्व बैंक के अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार भारत का ब्याज भुगतान वर्ष  2022 में 15.08 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 22.54 अरब डॉलर हो गया है। जहां दीर्घकालिक ऋण का स्टॉक वर्ष 2023 में 7% बढ़कर 498 अरब डॉलर हो गया है, वहीं अल्पकालिक ऋण का स्टॉक 2023 में मामूली गिरावट के साथ 126.32 अरब डॉलर है। बाहरी ऋण का स्टॉक निर्यात के % के रूप में 80 %था, जबकि ऋण सेवा 2023 में निर्यात का 10 % था।

विश्व बैंक की अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष  2024

विश्व बैंक की अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष  2024  के दौरान शुद्ध ऋण प्रवाह 33.42 अरब डॉलर रहा, जबकि शुद्ध इक्विटी प्रवाह 2023 में 46.94 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था। भारत का बाह्य कर्ज 2023 में $647 बिलियन तक बढ़ा, दीर्घकालिक उधारी 7% बढ़ी, ब्याज भुगतान वर्ष  2022 में $15.08 बिलियन से बढ़कर अगले वर्ष $22.54 बिलियन हो गया था।

विश्व बैंक की अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार भारत का बाह्य ऋण वर्ष  2023 में $31 बिलियन बढ़कर $646.79 बिलियन हो गया । ब्याज भुगतान वर्ष 2022 में $15.08 बिलियन से बढ़कर अगले वर्ष $22.54 बिलियन हो गया। दीर्घकालिक ऋण  का हिस्सा 7% बढ़कर $498 बिलियन हो गया, जबकि वर्तमान ऋण कम हो कर  $126.32 बिलियन हो गया  है।  
रिपोर्ट के अनुसार 2023 में  बाह्य ऋण  का अनुपात निर्यात के % के रूप में 80% था, जबकिऋण सेवा निर्यात का 10% थी । विश्व बैंक की अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट  2024 वर्ष में  दौरान शुद्ध ऋण का प्रवाह $33.42 बिलियन रहा, जबकि शुद्ध इक्विटी प्रवाह 2023 में $46.94 बिलियन अधिक था।
भारत  में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार  है जो समष्टि झटकों को सहने की शक्ति प्रदान करता है । वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के पास $640 बिलियन से अधिक विदेशी मुद्रा है।
विश्व बैंक ने सितंबर में कमज़ोर बाहरी वातावरण और महामारी के प्रभावों के समाप्त होने के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि को वित्तीय वर्ष 2025 में 7% रहने का पूर्वानुमान है। जिसे अपनी द्विवार्षिक भारत डवलपमेन्ट अध्ययन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट मे अंकित किया है।राजनीतिक स्थिति,  वस्तुओं की कीमतों और  आपूर्ति श्रृंखला डवलपमेन्ट प्रभावित करते है ।  बढ़ती महंगाई वैश्विक ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च बनाए रख सकती है। भारत 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है । परन्तु गरीबी और टूटा अवस्थपना ढांचा बडी रुकावट है । 

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