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الثلاثاء، 18 مارس 2025

अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 2 - परिभाषाएँ

 अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 2 - परिभाषाएँ

डा. लोकेश शुक्ल  कानपुर 9450125954







अधिवक्ता अधिनियम, 1961 भारत में विधिक पेशे को विनियोजित और नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण अधिनियम है। इस अधिनियम की धारा 2 में "परिभाषाएँ" दी गई हैं, जो इस अधिनियम के संदर्भ में विभिन्न शब्दों और वाक्यांशों के अर्थ को स्पष्ट करती है।
धारा 2 के अंतर्गत कुछ मुख्य परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:
1. अधिवक्ता : यह शब्द उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जिसने इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी नामावलि में पंजीकरण कराया हो।
अधिवक्ता, जिसे हिंदी में वकील भी कहा जाता है, वह व्यक्ति है जिसने कानून के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त की है और उसे अदालत में अपने ग्राहकों की ओर से प्रतिनिधित्व करने का विशेषाधिकार प्राप्त है अधिवक्ता का कार्य केवल न्यायालय में ही नहीं, बल्कि अपने ग्राहकों को कानूनी सलाह देना, दस्तावेजों को तैयार करना और विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करना  शामिल होता है.
एक अधिवक्ता केवल तभी अधिवक्ता माना जाता है जब वह संबंधित बार परिषद में पंजीकृत हो और नेशनल या स्टेट बार परीक्षा पास की हो. यह व्यक्ति कानून के विभिन्न क्षेत्रों में अभ्यास कर सकता है, जैसे सिविल, आपराधिक, परिवार, अंतर्राष्ट्रीय कानून आदि.
अधिवक्ता का मुख्य कार्य अपने ग्राहकों का न्यायालय में प्रतिनिधित्व करना है, जो उन्हें अपने मामलों में कानूनी प्रक्रिया के दौरान अपने हितों की रक्षा करने में मदद करता है.
अधिवक्ता किसी भी कानूनी विषय पर अपने क्लाइंट को सलाह देने का काम करते हैं और विभिन्न कानूनी दस्तावेजों का निर्माण करते हैं . अधिवक्ता अपने क्लाइंट को कानूनी टकराव से बचाने की कोशिश करते हैं तथा विवादों को निपटाने में सहायक होते हैं अधिवक्ता के सभी कार्य प्रक्रिया को विधिक रूप में सही और न्याय संगत बनाने के लिए होते हैं, जिससे उनके क्लाइंट के अधिकारों की रक्षा हो सके.
अधिवक्ता का हिंदी में अर्थ वकील है और वह कानूनी रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति होता है जो अदालत में अपने ग्राहक का प्रतिनिधित्व करता है। इस पेशे में आने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति ने कानून में डिग्री प्राप्त की हो और उसे वकालत करने का लाइसेंस प्राप्त हो। अधिवक्ता का उत्तरदायित्व कानून के सन्दर्भ में अपने क्लाइंट की सहायता करना और कानूनी सलाह देना होता है.
2. नियुक्ति : ख़ास प्रावधानों के संदर्भ में, यह वह दिन है जब उस प्रावधान का कार्यान्वयन शुरू होता है।
3. बार काउंसिल : यह उस बार काउंसिल को संदर्भित करता है जो इस अधिनियम के अंतर्गत स्थापित की गई है।
4.भारतीय बार काउंसिल: यह बार काउंसिल भारत के लिए है डालित क्षेत्रों में दी गई है।
5. उच्च न्यायालय : यह शब्द उच्चतम न्यायालय के अलावा अन्य उच्च न्यायालयों को संदर्भित करता है।
6. विधि स्नातक : यह उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जिसने भारत के किसी विश्वविद्यालय से विधि की स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।
7. कानूनी पेशेवर : यह अधिवक्ता या किसी भी उच्च न्यायालय का वकील, वकील, मु्गल तंत्र या राजस्व एजेंट को संदर्भित करता है।
इन परिभाषाओं के माध्यम से, अधिवक्ता अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न शब्दों और उनके उपयोग का सही अर्थ समझा जा सके, ताकि अधिनियम का सही कार्यान्वयन हो सके और विधिक पेशे में पारदर्शिता बनी रहे।

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