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الاثنين، 19 يناير 2026

मौनी अमावस्या आज:त्योहार हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण

 माघ महीने में आने वाली अमावस्या 
पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा के लिए जाना जाता है
इस दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है 
 स्नान से व्यक्ति के पाप धुल जाते 
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से मन को शांति 
आत्मिक ऊर्जा में वृद्धि 
कानपुर 18 जनवरी 2026
आज मौनी अमावस्या का दिन है, जिसे विशेष रूप से उपवास, मौन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर माघ महीने में आने वाली अमावस्या के रूप में।

मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या को विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा के लिए जाना जाता है। इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र जलाशयों में स्नान करने का विशेष महत्व है। जैसे कि मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है और स्नान से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं.

मौन व्रत

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और आत्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। मौन रहकर ध्यान और प्रार्थना करने से साधक के मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है. इसलिए इस दिन मौन रहकर और धार्मिक क्रियाओं में लिप्त होना अत्यंत फलदायी माना जाता है.

पूजा विधि और दान

मौनी अमावस्या पर विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं:

  • स्नान: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें.
  • दान: इस दिन वस्त्र, अनाज और अन्य सामग्री का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से चावल, तिल, और वस्त्र का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
  • शिव पूजा: भगवान शिव की पूजा करना भी इस दिन एक आवश्यक अनुष्ठान है। इस दिन शिवलिंग पर आक के पत्ते और बेलपत्र चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है.

विशेष उपाए

  1. तुलसी पूजा: शाम को तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना और प्रार्थना करना।
  2. पितृ तर्पण: पितरों के लिए विशेष ध्यान और तर्पण करना आवश्यक है।
  3. धूप-ध्यान: पितरों के लिए धूप ध्यान करना, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रह सके.

मौनी अमावस्या का यह दिन आत्मिक शुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उत्थान का पर्व है, जहाँ व्यक्ति अपने आप को दर्शाते हुए ईश्वर की ओर बढ़ता है। इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक और सामाजिक समृद्धि के लिए दान-पुण्य और श्रद्धा से पूजा अर्चना करने की सलाह दी जाती है.

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