- परहित के कार्य में समर्पण से व्यक्ति राम जैसे बनता
- दूसरों के अधिकारों पर आक्रमण होता है, तब संघर्ष उत्पन्न होता है।
- सच्ची भक्ति व आत्मिक मिलन के लिए, बाहरी चीज़ों को छोड़कर मन के भीतर झांकना चाहिए।
- दूसरों के अधिकारों पर आक्रमण होता है, तब संघर्ष उत्पन्न होता है।
- सच्ची भक्ति व आत्मिक मिलन के लिए, बाहरी चीज़ों को छोड़कर मन के भीतर झांकना चाहिए।
कानपुर: 19 जनवरी 2026
डा. सुरेश अवस्थी की इस कविता में परहित और समरसता के महत्व पर जोर दिया गया है। दूसरों के अधिकारों की रक्षा न करने पर महाभारत जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। प्रेम और एकता की बात करते हुए, यह बताया गया है कि सच्चा ईश्वर मिलन भीतर की साधना से ही संभव है। अंत में, सूरज और चाँद के मिलन के माध्यम से जीवन में एक विशेष चमक की बात की गई है।
डा. सुरेश अवस्थी की इस कविता में परहित और समरसता के महत्व पर जोर दिया गया है। दूसरों के अधिकारों की रक्षा न करने पर महाभारत जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। प्रेम और एकता की बात करते हुए, यह बताया गया है कि सच्चा ईश्वर मिलन भीतर की साधना से ही संभव है। अंत में, सूरज और चाँद के मिलन के माध्यम से जीवन में एक विशेष चमक की बात की गई है।
अपने हित सब छोड़ जो,परहित करता काम।
समरसता व त्याग से, हो जाता वो राम ।
दूजे के अधिकार पर,जब जब होती घात।
तब तब हो महाभारत,निश्चय रात- विरात।
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तू तू मैं मैं छोड़ दे,कर ले सबसे प्यार।
पत्थर से भी एक दिन,फूटेगी जलधार ।
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जग में आते नाम बिन,लेकर केवल सांस।
मौत हुई, सांसें गईं,बचता नाम उजास।
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ईश मिलन जो चाहिए,इधर उधर मत ताक।
मन से मन की बात कर,मन के भीतर झांक।
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इधर उधर तू भटक मत, बाहर कुछ भी नाहिं।
अल्लाह, राम, मसीह सब,भीतर ही मिल जाहिं।
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सूरज चंदा को मिली,जग में चमक विशेष।
दोनों जब मिलते गले,होते धुंधले वेष।
डा. सुरेश अवस्थी हिंदी के प्रमुख समाचारपत्र दैनिक जागरण के वरिष्ठतम पत्रकार सहित हास्य कवि और व्यंग्यकार हैं, जिन्हें विभिन्न कवि सम्मेलनों में उनकी रचनाओं के लिए जाना जाता है। उनकी काव्यशैली हास्य और व्यंग्य का अद्भुत संयोजन प्रस्तुत करती है, जिससे वे दर्शकों का ध्यान जल्दी खींच लेते हैं। डॉ. अवस्थी ने कई कवि सम्मेलनों में भाग लिया है, जो दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों द्वारा आयोजित किए गए हैं।
कवि सम्मेलन और प्रदर्शन: डा. सुरेश अवस्थी ने काव्य सम्मेलनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जैसे कि पटना में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में, जहाँ वे हास्य-व्यंग्यात्मक रचनाएँ प्रस्तुत करते हैं। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर में भी उन्होंने अपनी कला प्रस्तुत की, जहाँ उनके साथ अन्य प्रसिद्ध कवियों ने भी भाग लिया।
साहित्यिक योगदान: उनका साहित्यिक योगदान केवल हास्य तक सीमित नहीं है। डॉ. अवस्थी का काम सामाजिक मुद्दों पर विचार करने के साथ-साथ उनमें हास्य का एक सच्चा अनुभव प्रस्तुत करने की दिशा में भी प्रभावी है। वो अपने कार्यों के माध्यम से समाज के वर्तमान हालातों का सटीक चित्रण करते हैं।
प्रसिद्धि और सम्मान: डा. सुरेश अवस्थी को कई सम्मान भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदीप सम्मान शामिल है। उनकी कविताएँ न केवल मुस्कान पैदा करती हैं बल्कि गंभीर मुद्दों पर भी प्रकाश डालती हैं।
ऑनलाइन उपस्थिति: वे यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर भी सक्रिय हैं, जहाँ वे अपनी रचनाएँ साझा करते हैं, जैसे कि "आंगन को तो बांट दिया, बापू को मत बांटो" शीर्षक की कविता
डा. सुरेश अवस्थी एक बहुआयामी कवि हैं जो हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक संज्ञानता बढ़ाने का कार्य करते हैं और कवि सम्मेलनों में विशेष पहचान हैं।




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