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الجمعة، 24 أكتوبر 2025

भारत के राजनीति में परिवारों -वंशवाद का प्रभाव: लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव

सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों में 21% सदस्य राजनीतिक परिवारों से
नेहरू-गांधी परिवारभारतीय राजनीति में एक प्रमुख नाम
वंशवाद की राजनीति की गहरी जड़ें हैं, जिससे नए चेहरें आगे नहीं आ पाते।

कानपुर:23 अक्टूबर
नई दिल्ली :23 अक्टूबर:भारत में राजनीतिक परिवारों का प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, देश में सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से 21% सदस्य राजनीतिक परिवारों से आते हैं।
भारत के राजनीतिक में परिवारों -वंशवाद का प्रभाव का महत्वपूर्ण स्थान है, जो चुनावों में प्रभाव डालते हैं, बल्कि समग्र राजनीतिक संस्कृति को भी प्रभावित करते हैं। संसद और विधानसभा में ऐसे सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो चुनावी राजनीति में पारिवारिक विरासत को अहमियत देते हैं।
नेहरू-गांधी परिवार: यह परिवार भारतीय राजनीति में एक प्रमुख नाम है, जिसमें जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, तथा सोनिया गांधी और उनके बच्चे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हैं।
मुलायम सिंह यादव का परिवार: समजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव ने भी इस परिवार को राजनीतिक मंच पर स्थापित किया।
चौधरी बंसीलाल का परिवार: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के परिवार में कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं, जिसमें उनके पुत्र और दामाद शामिल हैं।
वाईएस राजशेखर रेड्डी का परिवार: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी और उनके परिवार के अन्य सदस्य राजनीती में सक्रिय हैं, जिसमें उनके पुत्र वाईएस जगन मोहन रेड्डी शामिल हैं।
भारत में राजनीतिक परिवारों का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। वंशवाद नए और योग्य नेताओं के लिए चुनौती उत्पन्न करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सत्ता कुछ विशेष परिवारों में ही सीमित रहे। एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) की रिपोर्ट के अनुसार, वंशवाद भारत की राजनीति की गहरी जड़ें हैं, जिससे नए चेहरें आगे नहीं आ पाते।

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