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कानपुर नगर निगम विवाद के बीच स्थानीय विधायक महेश त्रिवेदी की टिप्पणी ने नई चर्चा छेड़ दी

 “असली अम्मा बनकर रहना चाहिए, सौतेली अम्मा नहीं”।
नगर निगम जैसी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुविधा और कल्याण सुनिश्चित करना
प्रशासन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे
घटना स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की जरूरत को रेखांकित करती हैं

कानपुर: 31 अक्टूबर 2026
नगर निगम में चल रही खींचतान के बीच किदवई नगर के भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी ने महापौर प्रमिला पांडेय को लेकर एक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि महापौर को “असली अम्मा बनकर रहना चाहिए, सौतेली अम्मा नहीं”। यह बयान इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सामने आया।
विधायक ने यह बात उस परंपरा के संदर्भ में कही जिसमें शहरवासी महापौर को “अम्मा” कहकर संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबोधन की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि महापौर पद पर पहुंचने के बाद जनता की अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं
नगर निगम में चल रहे विवादों और भाजपा के भीतर बढ़ती चर्चाओं से जुड़ी हुई मानी जा रही है। विधायक ने किसी विवाद को सीधे नहीं बढ़ाया, लेकिन “अम्मा” और “सौतेली अम्मा” के अंतर का उल्लेख कर एक राजनीतिक संदेश जरूर दिया।
इस बयान ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है, क्योंकि यह नगर निगम की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल और मौजूदा घटनाक्रम से जुड़ा हुआ माना जा रहा है विधायक ने नगर प्रशासन से जनता के प्रति अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है।विवाद की पृष्ठभूमि में नगर निगम के कामकाज और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ था। इस बीच विधायक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि नगर निगम जैसी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुविधा और कल्याण सुनिश्चित करना है।स्थानीय राजनीतिक हलकों में विधायक की इस टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर विधायक के बयान का समर्थन किया है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कुछ लोग इस विवाद को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी कर रहे हैं।विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि नगर प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील बनाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे।यह घटना स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की जरूरत को फिर से रेखांकित करती है। नागरिक अब इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि नगर निगम इस अपील पर कितनी गंभीरता से अमल करता है।
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