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INDIA ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट याचिका दाखिल : मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR प्रक्रिया पर रोक । सुनवाई 27 अक्टूबर को

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संयुक्त याचिका में 14 तकनीकी खामियां 
वकालतनामा की कमी, कोर्ट फीस और दस्तावेजों से जुड़ी त्रुटियां 
 कमियों को दूर किए बिना याचिका को औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सकेगा। 

कानपुर: 13 अक्टूबर 2026
नयी दिल्ली: 13 अक्टूबर 2026
विपक्षी  INDIA ब्लॉक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की स्वतंत्र जांच और 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है। 
इस पूरे मामले से जुड़े मुख्य बिंदु और सुनवाई की वर्तमान स्थिति नीचे दी गई है:याचिका पर सुनवाई की स्थिति: सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संयुक्त याचिका में 14 तकनीकी खामियां (procedural defects) पाई हैं। इनमें वकालतनामा की कमी, कोर्ट फीस और दस्तावेजों से जुड़ी त्रुटियां शामिल हैं। नियमों के तहत, इन कमियों को दूर किए बिना याचिका को औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सकेगा। 
27 अक्टूबर की सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट इसी विषय (SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज) से जुड़ी अन्य पूर्व-लंबित याचिकाओं पर 27 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करने के लिए पहले ही सहमत हो चुका है। अगर INDIA ब्लॉक की इस नई याचिका की तकनीकी खामियों को तब तक सुधार लिया जाता है, तो संभव है कि इसे भी 27 अक्टूबर को मुख्य मामले के साथ जोड़ (Tag) दिया जाए। 
मुख्य मांगें: लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge सहित गठबंधन के 11 नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित इस याचिका में Election Commission of India (ECI) के आंतरिक दस्तावेजों व फाइलों को सार्वजनिक करने, मतदाताओं को बिना पूर्व नोटिस दिए नाम न हटाने, और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाकर वोटर लिस्ट संशोधनों का ऑडिट कराने की मांग शामिल है। 
विपक्ष का आरोप: राहुल गांधी और विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में ईसीआई एकतरफा फैसले ले रहा है और SIR प्रक्रिया के जरिए विशेषकर युवाओं, प्रवासियों और हाशिए पर मौजूद वर्गों के वैध मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं। 
यह कानूनी कदम 12 अक्टूबर 2026 को विपक्ष द्वारा संसद से सुप्रीम कोर्ट मार्च ('मार्च फॉर डेमोक्रेसी') और दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें रोकने की घटना के बाद उठाया गया था। 
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