- राज्यसभा में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर नफरत और विभाजनकारी नारों का आरोप
- सरकार की उपलब्धियों जैसे अनुच्छेद 370 हटाना और आर्थिक सुधारों को उजागर किया।
- मोदी ने कहा कि कांग्रेस के समय 'डील' का मतलब घोटाला था।
- विकास, एकता और 'विकसित भारत' पर जोर
- विपक्ष को नकारात्मकता फैलाने वाला बताया
- विपक्ष ने नारेबाजी की और वॉकआउट किया, मोदी ने लोकतंत्र का अपमान बताया।
- संदर्भ कांग्रेस की एक रैली से जुड़ा था, जहां 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' जैसे नारे लगाए गए थे।
- भाषण आगामी राजनीतिक विमर्श का केंद्र
- बीजेपी इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति के उदाहरण के रूप में देखती है।
नई दिल्ली: 07 फरवरी2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्यसभा भाषण का सारांश तीन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित था। पहले, उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, पर आरोप लगाया कि वे नफरत और विभाजनकारी नारों का प्रचार करते हैं। दूसरे, उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों जैसे अनुच्छेद 370 हटाना और आर्थिक सुधारों को उजागर किया, और विपक्ष के पुराने घोटालों की तुलना की। तीसरे, उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया कि उनकी सरकार एकता और विकास पर केंद्रित है, जबकि विपक्ष नकारात्मकता फैलाता है। भाषण ने बजट सत्र के दौरान बढ़ते टकराव को दर्शाया और "मोहब्बत की दुकान" बनाम "कब्र खोदने" के नैरेटिव को चुनावी रणनीति के रूप में पेश किया। बीजेपी इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति के उदाहरण के रूप में देखती है, जबकि विपक्ष इसे पीएम की आक्रामक शैली के रूप में मानता है। लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे और वॉकआउट से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा आगामी महीनों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में लगभग 1 घंटा 37 मिनट (कुछ रिपोर्ट्स में 97 मिनट) का तीखा और व्यंग्यात्मक भाषण दिया। यह बजट सत्र के दौरान हुआ, जहां विपक्ष ने शुरू से ही नारेबाजी की और बाद में वॉकआउट कर दिया।भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:विपक्ष पर 'नफरत और विभाजन' का आरोप: पीएम मोदी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (जैसे टीएमसी, डीएमके, लेफ्ट) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' वाले नैरेटिव को निशाना बनाया और कहा कि जो 'मोहब्बत की दुकान' चलाते हैं, वही 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' जैसे नारे लगाते हैं। उन्होंने इसे नफरत का प्रतीक बताया, लोकतंत्र और संविधान का अपमान कहा, और दावा किया कि यह सिर्फ नारा नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर की गहरी नफरत और राजनीतिक हार का प्रतिबिंब है। पीएम ने कहा कि वे करोड़ों माताओं-बहनों के 'रक्षा कवच' हैं, इसलिए कोई भी कब्र नहीं खोद पाएगा। उन्होंने व्यंग्य किया कि वे रोज 2 किलो गाली खाते हैं, यही उनके स्वास्थ्य का राज है
विपक्ष पर नफरत और विभाजन का आरोप पीएम मोदी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों( जैसे टीएमसी डीएमके लेफ्ट पर जमकर हमला बोला। उन्होंने राहुलगांधी के मोहब्बत की दुकान वाले नैरेटिव को निशाना बनाया और कहाकि जो मोहब्बत की दुकान चलाते हैं वही मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे नारे लगाते हैं। उन्होंने इसे नफरत का प्रतीक बताया लोकतंत्र और संविधान का अपमान कहा और दावा किया कि यह सिर्फ नारा नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर की गहरी नफरत और राजनीतिक हार का प्रतिबिंब है। पीएम ने कहा कि वे करोड़ों माताओं-बहनों के रक्षा कवच हैं इसलिए कोईभी कब्र नहीं खोद पाएगा। उन्होंने व्यंग्य किया कि वे रोज किलो गाली खाते हैं यही उनके स्वास्थ्य का राज है।
सरकार की उपलब्धियां और विपक्ष की तुलना: मोदी ने अपनी सरकार के सुधारों को हाइलाइट किया, जैसे अनुच्छेद 370 हटाना, पाकिस्तान में स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, माओवादी आतंक पर नियंत्रण, सिंधु जल समझौते पर कदम, आर्थिक सुधार, मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट, ग्लोबल ट्रेड डील्स (यूएस और ईयू के साथ), बैंकिंग रिफॉर्म्स, और भारत को 'फ्रेजाइल फाइव' से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में प्रगति। उन्होंने विपक्ष के पुराने घोटालों (जैसे बोफोर्स) का जिक्र कर कहा कि कांग्रेस के समय 'डील' का मतलब घोटाला था, जबकि अब 'डील' गौरव की बात है। पीएम ने कांग्रेस को 'नो प्लानिंग, नो विजन' वाली पार्टी बताया और कहा कि वे परिवारवादी हैं, पीएम पद को अपनी 'जागीर' समझते हैं।
राजनीतिक संदेश और सदन की अशांति: भाषण के दौरान विपक्ष ने 'राहुल गांधी को बोलने दो', 'तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे नारे लगाए। पीएम ने मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र का जिक्र कर व्यंग्य किया कि उन्हें बैठकर नारे लगाने दें। विपक्ष के वॉकआउट के बाद भी मोदी ने स्पीच जारी रखी। उन्होंने लोकसभा में एक दिन पहले हुई अशांति को 'लोकतंत्र के मंदिर का अपमान' बताया। कुल मिलाकर, भाषण में विकास, एकता और 'विकसित भारत' पर फोकस था, जबकि विपक्ष को नकारात्मक, नफरत फैलाने वाला और पुरानी सोच वाला बताया। भाषण आगामी राजनीतिक बहस का केंद्र बनेगा, जहां बीजेपी इसे विपक्ष की 'नकारात्मक राजनीति' का सबूत मान रही है, जबकि विपक्ष इसे मोदी की आक्रामक और व्यक्तिगत शैली के रूप में देख रहा है। 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' का संदर्भ दिसंबर 2025 की एक कांग्रेस रैली (या इससे जुड़े घटनाक्रम) से जुड़ा माना जा रहा है, जहां ऐसे नारे लगने का दावा किया गया था, हालांकि कांग्रेस ने इसका खंडन किया।
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