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Thursday, February 26, 2026

NSE प्लेटफॉर्म: भारतीय निवेशक आसानी से सीधे अमेरिकी शेयर बाजार में ट्रेडिंग

भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक आसान पहुंच
भारतीय निवासी  वित्त वर्ष में 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक विदेशी निवेश या अन्य अनुमत लेनदेन 
वर्तमान में हर महीने औसतन 100 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार
 दैनिक औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम 5 अरब डॉलर से ज्यादा
ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल 
आधार ऑथेंटिकेशन, पैन कार्ड और DigiLocker के जरिए 30 से 45 सेकंड में KYC पूरी 
वेरिफिकेशन के बाद GIFT City  बैंक खाते में फंड ट्रांसफर 
ट्रेडिंग लिमिट और बाय-सेल ऑर्डर की सुविधा
कानपुर: फरवरी 26, 2026
NSE International Exchange (NSE IX) ने भारतीय निवेशकों के लिए एक नया ‘Global Access’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए अब वे सीधे अमेरिकी शेयर बाजार में ट्रेडिंग कर सकेंगे। NSE IX के एमडी और सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म IFSC लाइसेंस के तहत शुरू किया गया है और इसका उद्देश्य भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक आसान पहुंच देना है।
 NSE IX के एमडी और सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने बताया कि  प्लेटफॉर्म IFSC लाइसेंस के तहत शुरू किया गया है और इसका उद्देश्य भारतीय निवेशकों को ग्लोबल मार्केट तक आसान पहुंच देना है।
एमडी और सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने बताया कि यह पहल घरेलू बाजारों से आगे निवेशकों की पहुंच का संरचनात्मक विस्तार है। बालासुब्रमण्यम के अनुसार फिलहाल अमेरिकी बाजार लाइव हो चुका है, क्योंकि यह निवेशकों की सबसे बड़ी रुचि का बाजार है। अगले तीन से छह महीनों में 30 से अधिक ग्लोबल मार्केट प्लेटफॉर्म पर जोड़े जाएंगे।
यह प्लेटफॉर्म Reserve Bank of India (RBI) की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत काम करेगा। इस स्कीम के अनुसार, भारतीय निवासी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक विदेशी निवेश या अन्य अनुमत लेनदेन के लिए भेज सकते हैं।
बालासुब्रमण्यम ने कहा कि ऑनबोर्डिंग से लेकर ट्रेडिंग तक पूरी प्रक्रिया रेगुलेटरी ढांचे के अनुरूप तैयार की गई है।
कैसे खरीद पाएंगे महंगे शेयरग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म की एक प्रमुख खासियत फ्रैक्शनल ट्रेडिंग है। इससे निवेशक महंगे विदेशी शेयरों का पूरा शेयर खरीदने के बजाय उसका आंशिक हिस्सा खरीद सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर Apple Inc . का शेयर 272 डॉलर का है और निवेशक के पास 31 डॉलर हैं, तो वह 5 डॉलर के बराबर Apple का हिस्सा भी खरीद सकता है। यह सुविधा विदेशी ब्रोकर्स के साथ साझेदारी के जरिए संभव बनाई गई है।
प्लेटफॉर्म पर सभी निवेश अमेरिकी डॉलर में होंगे। भारत से भेजी गई राशि पहले विदेशी रेमिटेंस के जरिए डॉलर में बदली जाएगी और फिर ट्रेडिंग अकाउंट में जमा होगी। निवेशक वेब और मोबाइल दोनों माध्यमों से प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। आधार ऑथेंटिकेशन, पैन कार्ड और DigiLocker के जरिए 30 से 45 सेकंड में KYC पूरी की जा सकती है। वेरिफिकेशन के बाद निवेशक GIFT City स्थित बैंक खाते में फंड ट्रांसफर करेंगे, जिसके बाद उन्हें ट्रेडिंग लिमिट और बाय-सेल ऑर्डर की सुविधा मिल जाएगी।
NSE International Exchange के एमडी और सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने स्पष्ट किया कि ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म पर केवल LRS के तहत अनुमत एसेट क्लास ही उपलब्ध होंगे। निवेशक फिलहाल केवल इक्विटी और ETF में निवेश कर सकेंगे। डेरिवेटिव, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल एसेट्स को प्लेटफॉर्म पर अनुमति नहीं दी गई है।
 यह सुविधा रिटेल निवेशकों के लिए उपलब्ध है, लेकिन तीसरे चरण में भारतीय संस्थागत निवेशकों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। बालासुब्रमण्यम ने यह भी कहा कि GIFT Nifty डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग वॉल्यूम में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में हर महीने औसतन 100 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार हो रहा है, जबकि दैनिक औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम 5 अरब डॉलर से ज्यादा है।
रणनीतिक दृष्टि से NSE IX का उद्देश्य भारत में इनबाउंड निवेश को आकर्षित करना और भारतीय निवेशकों को आउटबाउंड निवेश के लिए वैश्विक अवसर उपलब्ध कराना है। GIFT City के जरिए आउटबाउंड निवेश का विस्तार भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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