शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का समावेश
भारत में श्रम बल के आंकड़े समय पर उपलब्ध रहें, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलती है।
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में भी वृद्धि
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी 41.7% पुरुषों में 78.8% ।
पीएलएफएस का उद्देश्य रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को नियमित रूप से मापना है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का समावेश किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत में श्रम बल के आंकड़े समय पर उपलब्ध रहें, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलती है।
नवीनतम रिपोर्टों में दिखाया गया है कि 2023-24 के दौरान, श्रम बल भागीदारी दर 60.1% तक बढ़ गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में भी वृद्धि देखी गई है। इस साल, महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी 41.7% तक पहुँच गई, जबकि पुरुषों में यह 78.8% रही।
इन आंकड़ों का परिणाम भारत के श्रम बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन इनके साथ ही आर्थिक विकास के लिए भी कई चुनौतियाँ हैं, जैसे कि औपचारिक नौकरियों की कमी और श्रम बाजार में स्थिरता लाने की आवश्यकता। वी. अनंत नागेश्वरन का यह बयान भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसरों और उनकी स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत दर्शा रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता भी बनी हुई है।
कानपुर: 2 जून 2026
नई दिल्ली: 2 जून 2026
दिल्ली में, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के लॉन्च के बाद से भारतीय रोजगार की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। उनके बयान के अनुसार, बेरोजगारी दर 2023-24 में 6% से घटकर 3.2% हो गई है, जो पिछले वर्ष के स्तर के समान है.पीएलएफएस का उद्देश्य रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को नियमित रूप से मापना है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का समावेश किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत में श्रम बल के आंकड़े समय पर उपलब्ध रहें, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलती है।
नवीनतम रिपोर्टों में दिखाया गया है कि 2023-24 के दौरान, श्रम बल भागीदारी दर 60.1% तक बढ़ गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में भी वृद्धि देखी गई है। इस साल, महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी 41.7% तक पहुँच गई, जबकि पुरुषों में यह 78.8% रही।
इन आंकड़ों का परिणाम भारत के श्रम बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन इनके साथ ही आर्थिक विकास के लिए भी कई चुनौतियाँ हैं, जैसे कि औपचारिक नौकरियों की कमी और श्रम बाजार में स्थिरता लाने की आवश्यकता। वी. अनंत नागेश्वरन का यह बयान भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसरों और उनकी स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत दर्शा रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता भी बनी हुई है।




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