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मेरठ रोहटा मेरठ ललिता गौतम हत्याकांड

 हत्याकांड की पृष्ठभूमि: मई 2026 लापता
 17 मई 2026 को ललिता का शव रोहटा थाना क्षेत्र के जंगल/खेत से बरामद
ललिता के परिजनों और विभिन्न दलित संगठनों का आरोप:  पुलिस  मामले में निष्पक्ष नहीं 
कांग्रेस ने पीड़ित परिवार से मिलने के लिए एक 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का  किया गठन 
सोशल मीडिया पोस्ट से
कानपुर नगर: जुलाई 10, 2026
Poonam Pandit 39 मिनट 
रात के दो बज चुकी के हैं कल मुझे मेरठ रोहटा मेरठ ललित गौतम हत्याकांड पर परिवार वालों से मिलने जाना था लेकिन सरकार इतनी ज्यादा डरी हुई है कि दिन देख रहे ना रात देख रहे रात के 1:00 से घर पर पुलिस तैनात कर दी है लेकिन कोशिश जारी रहेगी अपने सभी भाई बहनों से निवेदन है कि जिसको कल का जो भी बताया गया है उसको फॉलो करें कोई भी चीज बदले ना
मेरठ: जुलाई 10, 2026
मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड (जिसे लोग सोशल मीडिया और बोलचाल में ललित गौतम भी लिख रहे हैं) मई 2026 की एक अत्यंत चर्चित और संवेदनशील घटना है. मूल रूप से मेरठ के रोहटा क्षेत्र (थिरौट गांव) की रहने वाली 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम टीपी नगर क्षेत्र में रहकर बीए (BA) की पढ़ाई कर रही थी.
विवरण और हालिया घटनाक्रम :
1. हत्याकांड की पृष्ठभूमि (मई 2026)लापता होना: ललिता गौतम 15 मई 2026 को परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. 16 मई को परिजनों ने टीपी नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
शव की बरामदगी: 17 मई 2026 को ललिता का शव रोहटा थाना क्षेत्र के जंगल/खेत से बरामद हुआ.
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी (छात्रा के परिचित/प्रेमी) अंकुश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. पुलिस जांच में दो अन्य लोगों के नाम भी सबूत मिटाने के आरोप में सामने आए थे.
2. परिजनों और दलित समाज के आरोप
ललिता के परिजनों और विभिन्न दलित संगठनों का आरोप है कि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है. मृतका की मां और परिजनों का दावा है कि इस वारदात में मुख्य आरोपी के अलावा निशांत और अंकित नामक युवक भी शामिल थे, जिन्होंने ललिता का अपहरण कर हत्या की.
परिजनों की मांग है कि मुख्य आरोपी के पूरे परिवार को जेल भेजा जाए, फरार आरोपियों को सख्त सजा मिले, और आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाए.
3. कलेक्ट्रेट पर भारी बवाल और लाठीचार्ज (जुलाई 2026)
हत्याकांड के लगभग दो महीने बाद, जुलाई 2026 में इस मामले ने एक बार फिर बड़ा रूप ले लिया: महापंचायत और प्रदर्शन: आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट और कमिश्नरी चौराहे पर दलित महापंचायत बुलाई गई थी. प्रदर्शनकारियों ने घंटों तक कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर सड़क जाम कर दी.
पुलिस की कार्रवाई: जब प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) किया.
एसएसपी का थप्पड़ कांड: प्रदर्शन के दौरान मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें वह एक बंदी वाहन के पास जाकर हिरासत में लिए गए युवक (रवि गौतम, जो खुद को वकील बता रहा था) को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं.
फांसी का प्रयास: हिरासत में लिए गए रवि गौतम ने पुलिस वाहन के अंदर अपने गमछे से कथित तौर पर फांसी लगाने का प्रयास भी किया, जिसे पुलिसकर्मियों ने समय रहते नाकाम कर दिया.
4. वर्तमान स्थिति और राजनीतिक मोड़मुकदमा और गिरफ्तारियां: पुलिस ने इस हंगामे और कलेक्ट्रेट पर हुए बवाल को लेकर 13 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. माहौल बिगाड़ने और उकसाने के आरोप में रवि गौतम और सपा नेता के बेटे हिमांशु सिद्धार्थ सहित कई उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.
गांव किया गया सील: तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मृतका के गांव थिरौट (रोहटा) की सीमाओं पर बैरिकेडिंग लगाकर उसे सील कर दिया है ताकि बाहरी राजनीतिक लोग या अराजक तत्व वहां न पहुंच सकें.
राजनीतिक घेराबंदी: इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता और लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है, वहीं यूपी कांग्रेस ने पीड़ित परिवार से मिलने के लिए एक 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है

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