माइलेज में कमी का वैज्ञानिक कारण कैलोरिफिक वैल्यू
इंजन सुरक्षा और आलोचनाओं पर खुली चुनौती झूठा नैरेटिव
इंजन सुरक्षा और आलोचनाओं पर खुली चुनौती झूठा नैरेटिव
कानपुर नगर: जुलाई 10, 2026
नई दिल्ली:10 जुलाई 2026
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब नहीं होते हैं, हालांकि उन्होंने माना कि इससे माइलेज में बेहद मामूली कमी आ सकती है. एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री ने E20 ईंधन मिश्रण पर हो रहे विवादों और दावों का सिलसिलेवार जवाब दिया:
नई दिल्ली:10 जुलाई 2026
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब नहीं होते हैं, हालांकि उन्होंने माना कि इससे माइलेज में बेहद मामूली कमी आ सकती है. एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री ने E20 ईंधन मिश्रण पर हो रहे विवादों और दावों का सिलसिलेवार जवाब दिया:
माइलेज में कमी का वैज्ञानिक कारण
कैलोरिफिक वैल्यू: नितिन गडकरी के अनुसार, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरिफिक वैल्यू) शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले कम होती है।
मामूली असर: इसी वैज्ञानिक कारण से ईंधन में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर औसत माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन यह कमी सामान्य परिस्थितियों में बहुत मामूली होगी। 1 ड्राइविंग स्थितियां: माइलेज में कमी सड़कों और ट्रैफिक की स्थिति (जैसे दिल्ली या मुंबई के बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में बार-बार लोअर गियर इस्तेमाल होना) पर भी काफी निर्भर करती है।
फ्लेक्स-फ्यूल इंजन: ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के लिए बनाई गई गाड़ियों की ईंधन दक्षता (माइलेज) पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
इंजन सुरक्षा और आलोचनाओं पर खुली चुनौती झूठा नैरेटिव: मंत्री ने सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने के दावों को 'सुनियोजित झूठा अभियान' करार दिया है।
मामूली असर: इसी वैज्ञानिक कारण से ईंधन में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर औसत माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन यह कमी सामान्य परिस्थितियों में बहुत मामूली होगी। 1 ड्राइविंग स्थितियां: माइलेज में कमी सड़कों और ट्रैफिक की स्थिति (जैसे दिल्ली या मुंबई के बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में बार-बार लोअर गियर इस्तेमाल होना) पर भी काफी निर्भर करती है।
फ्लेक्स-फ्यूल इंजन: ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के लिए बनाई गई गाड़ियों की ईंधन दक्षता (माइलेज) पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
इंजन सुरक्षा और आलोचनाओं पर खुली चुनौती झूठा नैरेटिव: मंत्री ने सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने के दावों को 'सुनियोजित झूठा अभियान' करार दिया है।
खुली चुनौती: उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि देश में एक भी ऐसी प्रमाणित कार दिखाई जाए जो केवल E20 ईंधन के इस्तेमाल से खराब हुई हो। 1
जांच और मुआवजा: उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों (मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स आदि) को अभी तक खराबी की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि किसी कार में ऐसी वास्तविक समस्या प्रमाणित होती है, तो सरकार उसकी गंभीरता से जांच कराएगी और पीड़ित को उचित राहत दी जाएगी।
पुराने वाहनों के लिए सरकार के निर्देश पार्ट्स बदलना: पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वाहन निर्माताओं को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित सर्विसिंग के दौरान उन पुराने पार्ट्स (जैसे पुराने मेटल वाशर की जगह रबर वाशर) को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदल दें, जिन पर इथेनॉल का मामूली असर पड़ सकता है। कड़े परीक्षण: E20 ईंधन को बाजार में उतारने से पहले ARAI और वाहन निर्माताओं द्वारा लगभग 4 साल तक लाखों किलोमीटर चलाकर कड़े परीक्षण किए गए हैं।
पुराने वाहनों के लिए सरकार के निर्देश पार्ट्स बदलना: पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वाहन निर्माताओं को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित सर्विसिंग के दौरान उन पुराने पार्ट्स (जैसे पुराने मेटल वाशर की जगह रबर वाशर) को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदल दें, जिन पर इथेनॉल का मामूली असर पड़ सकता है। कड़े परीक्षण: E20 ईंधन को बाजार में उतारने से पहले ARAI और वाहन निर्माताओं द्वारा लगभग 4 साल तक लाखों किलोमीटर चलाकर कड़े परीक्षण किए गए हैं।




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