परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार।
प्रभावित छात्रों/परिवारों को मुआवजा।
लद्दाख के संवैधानिक सुरक्षा (6वीं अनुसूची आदि) के मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।कानपुर नगर: जुलाई 17, 2026
नई दिल्ली : जुलाई 17, 2026
सोनम वांगचुक जी के अनशन (लगभग दिन 18-20) पर अपडेट:
सोनम वांगचुक का अनशन (दिन 20): पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गंभीर निर्जलीकरण के बावजूद यह संकल्प लिया कि वे “किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक ज़िंदा रहेंगे।” विपक्षी दलों ने उनके समर्थन में आवाज़ बुलंद की और आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश की।
पर्यावरण कार्यकर्ता, शिक्षा सुधारक और लद्दाख के मुद्दों की मजबूत आवाज़ सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर Cockroach Janata Party (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। यह आंदोलन मुख्य रूप से परीक्षा प्रणाली (NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं) में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा है।
मुख्य मांगेंकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार।
प्रभावित छात्रों/परिवारों को मुआवजा।
लद्दाख के संवैधानिक सुरक्षा (6वीं अनुसूची आदि) के मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
20 जुलाई को संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च की योजना है, जिसे आंदोलनकारी राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहते हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समर्थन व्यक्त किया है।
स्वास्थ्य स्थिति
वांगचुक केवल नमक-पानी पर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार:वजन में 7-9 किलो की कमी।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कम स्तर पर हैं।
गंभीर निर्जलीकरण और कमजोरी के बावजूद वे संकल्पित हैं।
उन्होंने कहा है कि वे 20 जुलाई तक ज़िंदा रहेंगे और मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। कई हस्तियों (अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह आदि) ने स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है।
यह घटना वाकई शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर देशव्यापी बहस तेज़ कर रही है। छात्रों, अभिभावकों और युवाओं में गुस्सा गहरा है। साथ ही, लद्दाख के पर्यावरणीय और राजनीतिक मुद्दों को भी फिर से राष्ट्रीय पटल पर ला रहा है।
शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन सभी पक्षों को संवेदनशीलता और समाधान की दिशा में सोचना चाहिए।
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठे हैं। आज (17 जुलाई 2026) उनके अनशन का 20वां दिन है। वह 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के मंच से देश के युवाओं और छात्रों के समर्थन में यह आंदोलन कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET-UG) में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
परीक्षा प्रणाली में सुधार: देश की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करना।
स्वास्थ्य की स्थिति
लगातार भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है।उनका वजन करीब 8 से 9 किलो तक कम हो चुका है।
डॉक्टरों के अनुसार, उनके शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ गया है और वे 'भुखमरी के दूसरे चरण' (Prolonged Starvation) में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे अंगों पर असर पड़ने की चिंता और बढ़ गई है।
गिरते स्वास्थ्य के बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है, जिसके बाद अदालत ने सरकार को उनकी सेहत की चौबीसों घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया है।
आंदोलन का अगला कदम और समर्थन20 जुलाई को संसद मार्च: वांगचुक ने गिरती सेहत के बावजूद अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि वे 20 जुलाई 2026 को होने वाले 'संसद मार्च' में भारी संख्या में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हों। [1, 2, 3, 4]
बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक समर्थन: इस अनशन को विपक्ष के कई बड़े नेताओं (जैसे अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, डिंपल यादव और पवन खेड़ा) के साथ-साथ बॉलीवुड हस्तियों (जैसे आमिर खान, शत्रुघ्न सिन्हा, स्वरा भास्कर और सोनाक्षी सिन्हा) का समर्थन मिला है। सभी ने वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध किया है, हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सोनम वांगचुक के पूर्व के प्रमुख अनशन (इतिहास)
यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक ने अनशन का रास्ता चुना है। इससे पहले उन्होंने लद्दाख के अधिकारों के लिए बड़े आंदोलन किए हैं: सितंबर 2025 (35 दिनों का अनशन): लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने, अलग लोक सेवा आयोग (PSC) और संसद में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की मांगों को लेकर उन्होंने लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के साथ मिलकर 35 दिनों का सबसे लंबा अनशन किया था। इस दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में भी लिया गया था, जिसे मार्च 2026 में अदालत ने रद्द कर दिया था।
मार्च 2024 (21 दिनों का अनशन): लद्दाख के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए उन्होंने लेह में शून्य से नीचे (-11°C) के तापमान में 21 दिनों तक 'जलवायु उपवास' (Climate Fast) किया था, जिसे देश-दुनिया में काफी चर्चा मिली थी।
यह देशभर में शिक्षा और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर बहस को और तेज़ कर रही है।




0 Comments