तेल की कीमतों पर दबाव
विदेशी निवेशकों का रुख
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स भी दबाव में
निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और सरकारी बॉन्ड्स की ओर बढ़ा।कानपुर: 8 जुलाई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार (Sensex) पर नकारात्मक पड़ रहा है, मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे सेंसेक्स पर पड़ा है। सेंसेक्स 1,677 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, जो निवेशकों के लिए चिंता का संकेत है।
आज 8 जुलाई 2026 शुरुआती कारोबार में 500-700 पॉइंट्स गिरकर 77,600 के आसपास रहा कुछ रिपोर्ट्स में 1,600+ पॉइंट्स की गिरावट का जिक्रहै।
Nifty 150-500+ पॉइंट्स नीचे 24,200-23,880 के आसपास।
India VIX (डर का सूचकांक) 7-28% तक उछला, जो बाजार में अनिश्चितता और volatility बढ़ने का संकेत है।
मुख्य कारण: US ने ईरान पर स्ट्राइक्स किए (Strait of Hormuz में जहाजों पर हमलों के जवाब में), Trump ने ceasefire को “over” बताया (हालांकि बातचीत जारी रखने की गुंजाइश), और Iran के oil export waiver वापस लिया गया। इससे Brent crude $75-78 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
Sensex क्यों प्रभावित है?तेल की महंगाई: भारत 85%+ तेल आयात करता है। कीमतें बढ़ने से Current Account Deficit बढ़ता है, रुपये पर दबाव पड़ता है, और inflation बढ़ने का खतरा।
Sectoral Impact:नुकसान: Reliance Industries (RIL), IndiGo, Asian Paints, Maruti, M&M, Bajaj Finance आदि 1-2%+ गिरे (तेल-संवेदनशील सेक्टर)।
फायदा: कुछ IT/Pharma स्टॉक्स हरे (safe haven जैसे)।
Global Risk-Off: Wall Street कमजोर, FII बिकवाली की आशंका, निवेशक safe assets (gold, bonds) की ओर भागे।
व्यापक संदर्भ
पिछले महीनों में US-Iran peace framework (Strait of Hormuz खोलने वाला) से तेल सस्ता हुआ था और Sensex को सपोर्ट मिला था। अब escalation उलटा असर डाल रहा है। अगर तनाव लंबा खिंचा तो:रुपये कमजोर होना,
FII outflows,
Aviation, Paints, Tyres, Auto, OMCs पर दबाव बढ़ सकता है।
गिरावट के कारण
जियोपॉलिटिकल तनाव: अमेरिका–ईरान टकराव से वैश्विक बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ी।
तेल की कीमतों पर दबाव: मध्य-पूर्व में तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर आशंका।
विदेशी निवेशकों का रुख: FII (Foreign Institutional Investors) ने जोखिम कम करने के लिए बिकवाली तेज़ की।
असर
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स भी दबाव में रहे।
निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और सरकारी बॉन्ड्स की ओर बढ़ा।




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