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पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट सफल उड़ान परीक्षण: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन

निर्धारित न्यूनतम 60 किलोमीटर की मारक क्षमता को जांचने के लिए किया गया
अत्याधुनिक रॉकेट प्रणाली को पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया
परीक्षण की मुख्य विशेषताएं सटीक निशाना
एक लॉन्चर प्लेटफॉर्म से अलग-अलग रेंज वाले पिनाका को बिना किसी बड़े बदलाव के लॉन्च संभव
ओडिशा: 9 जुलाई 2026
कानपुर: 9 जुलाई 2026
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 8 जुलाई 2026 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का एक और सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण उपयोगकर्ता (भारतीय सेना) द्वारा निर्धारित न्यूनतम 60 किलोमीटर की मारक क्षमता को जांचने के लिए किया गया था। इस सफल परीक्षण से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: परीक्षण की मुख्य विशेषताएं सटीक निशाना: उड़ान के दौरान रॉकेट ने पहले से तय किए गए रास्ते (ट्रैजेक्टरी) का बिल्कुल ठीक पालन किया और "टेक्स्टबुक प्रिसिजन" (अचूक सटीकता) के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार किया। लॉन्चर की बहुमुखी प्रतिभा: इस रॉकेट को सेना में पहले से सेवा दे रहे मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया। इससे यह सिद्ध होता है कि एक ही लॉन्चर प्लेटफॉर्म से अलग-अलग रेंज वाले पिनाका के विभिन्न वेरिएंट्स को बिना किसी बड़े बदलाव के लॉन्च किया जा सकता है। परीक्षण के दौरान चांदीपुर रेंज में तैनात रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसे सभी उपकरणों ने पूरी उड़ान के दौरान रॉकेट की निगरानी की।
स्वदेशी तकनीक और विकासकर्ता इस अत्याधुनिक रॉकेट प्रणाली को पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है:
PIB मुख्य डिजाइन: आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने इसे विकसित किया है।
PIB सहयोगी संस्थान: इसमें हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेट्री (HEMRL), डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेट्री (DRDL) और रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) का महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग शामिल रहा।
रक्षा क्षेत्र में महत्व इससे पहले दिसंबर 2025 में इस गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का 120 किलोमीटर की अधिकतम सीमा के लिए पहला सफल परीक्षण किया जा चुका है। अब न्यूनतम 60 किमी की रेंज का यह परीक्षण इसकी हर परिस्थिति में काम करने की क्षमता और सटीकता को मजबूत करता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेटों के स्वदेशी विकास में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है, जिससे भारतीय सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) क्षमताओं में भारी इजाफा होगा।

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