UPEIDA राज्य को देश के सबसे बड़े और उन्नत रक्षा क्लस्टरों में विकसित कर रहा है
मेगा प्रोजेक्ट के जरिए अब तक लगभग ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
कानपुर नोड: सबसे बड़ा निवेश केंद्र
लखनऊ और कानपुर के मध्य उन्नाव को 7वें नोड के रूप में विकसित करने की शुरुआती मंजूरीलखनऊ : 8 जुलाई 2026
कानपुर: 8 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के विभिन्न नोड्स के तहत रक्षा विनिर्माण कंपनियों को 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। इस कॉरिडोर के माध्यम से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) राज्य को देश के सबसे बड़े और उन्नत रक्षा क्लस्टरों में विकसित कर रहा है। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए अब तक लगभग ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
विभिन्न नोड्स के तहत रक्षा विनिर्माण कंपनियों, उनके कार्यों और निवेश की स्थिति का विवरण इस प्रकार है:
नोड-वार रक्षा विनिर्माण क्षमताएं
UPDIC के तहत प्रत्येक नोड को उसकी विशिष्ट औद्योगिक क्षमता के आधार पर विशेष क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है:
कानपुर नोड (सबसे बड़ा निवेश केंद्र):
विशेषज्ञता: लघु शस्त्र, गोला-बारूद, छोटे हथियारों के विनिर्माण के लिए। और बैलिस्टिक सुरक्षा उपकरण।
प्रमुख कंपनियां: अडानी डिफेंस ने यहाँ बड़े पैमाने पर गोला-बारूद संयंत्र स्थापित किया है। इसके अलावा पिनाका इंडिया जैसी कंपनियां बैलिस्टिक सामग्री और सुरक्षा गियर का विनिर्माण कर रही हैं।
निवेश: यहाँ सबसे अधिक ₹13,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हैं।
लखनऊ नोड (मिसाइल और एयरोस्पेस हब):
विशेषज्ञता: मिसाइल, एयरोस्पेस और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर रही हैं।
प्रमुख कंपनियां: डीआरडीओ की ब्रह्मोस मिसाइल फैसिलिटी यहाँ अत्याधुनिक ब्रह्मोस नेक्स्ट-जेन मिसाइलों का उत्पादन कर रही है।
निवेश: इस नोड में ₹4,850 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
झांसी नोड:
विशेषज्ञता: विस्फोटक, और हेवी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए। प्रोपल्शन सिस्टम और भारी रक्षा विनिर्माण।
प्रमुख कंपनियां: भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) यहाँ मिसाइल और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए संयंत्र स्थापित कर रही है।
निवेश: यहाँ ₹12,190 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं। अलीगढ़ नोड:
विशेषज्ञता: ड्रोन निर्माण (UAVs), इलेक्ट्रॉनिक, सेंसर सिस्टम, वारफेयर सिस्टम और छोटे कलपुर्जे।
निवेश: इसमें ₹4,581करोड़ मूल्य के प्रस्ताव शामिल हैं। चित्रकूट नोड:
चित्रकूट नोड:
विशेषज्ञता: रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्ट्रोनिक्स, सिस्टम इंटीग्रेशन क्लस्टरऔर ।
निवेश: यहाँ ₹4,392 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर काम चल रहा है।
आगरा नोड:
विशेषज्ञता: विमानन कलपुर्जे और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति।
निवेश: इस नोड को ₹607 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्नाव नोड:
लखनऊ और कानपुर के मध्य उन्नाव को हाल ही में कॉरिडोर के 7वें नोड के रूप में विकसित करने की शुरुआती मंजूरी भी दी गई है।
औद्योगिक प्रगति और मुख्य आंकड़ेभूमि आवंटन: कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि में से 1,142 हेक्टेयर भूमि 65 से अधिक रक्षा उत्पादक कंपनियों को दी जा चुकी है।
संचालन: लगभग 7 बड़ी रक्षा विनिर्माण कंपनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि 47 से अधिक कंपनियों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
एमएसएमई को बढ़ावा: यह कॉरिडोर राज्य के मजबूत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आधार को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रहा है।
आर्थिक लक्ष्य: यह परियोजना देश के ₹38,424 करोड़ (वर्ष 2025-26) के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात को गति दे रही है और यूपी को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में मदद कर रही
इस पहल के तहत राज्य में प्रमुख रक्षा क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं:
यह उत्तर प्रदेश को देश के बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है
मेगा प्रोजेक्ट के जरिए अब तक लगभग ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
कानपुर नोड: सबसे बड़ा निवेश केंद्र
लखनऊ और कानपुर के मध्य उन्नाव को 7वें नोड के रूप में विकसित करने की शुरुआती मंजूरीलखनऊ : 8 जुलाई 2026
कानपुर: 8 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के विभिन्न नोड्स के तहत रक्षा विनिर्माण कंपनियों को 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। इस कॉरिडोर के माध्यम से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) राज्य को देश के सबसे बड़े और उन्नत रक्षा क्लस्टरों में विकसित कर रहा है। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए अब तक लगभग ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
विभिन्न नोड्स के तहत रक्षा विनिर्माण कंपनियों, उनके कार्यों और निवेश की स्थिति का विवरण इस प्रकार है:
नोड-वार रक्षा विनिर्माण क्षमताएं
UPDIC के तहत प्रत्येक नोड को उसकी विशिष्ट औद्योगिक क्षमता के आधार पर विशेष क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है:
कानपुर नोड (सबसे बड़ा निवेश केंद्र):
विशेषज्ञता: लघु शस्त्र, गोला-बारूद, छोटे हथियारों के विनिर्माण के लिए। और बैलिस्टिक सुरक्षा उपकरण।
प्रमुख कंपनियां: अडानी डिफेंस ने यहाँ बड़े पैमाने पर गोला-बारूद संयंत्र स्थापित किया है। इसके अलावा पिनाका इंडिया जैसी कंपनियां बैलिस्टिक सामग्री और सुरक्षा गियर का विनिर्माण कर रही हैं।
निवेश: यहाँ सबसे अधिक ₹13,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हैं।
लखनऊ नोड (मिसाइल और एयरोस्पेस हब):
विशेषज्ञता: मिसाइल, एयरोस्पेस और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर रही हैं।
प्रमुख कंपनियां: डीआरडीओ की ब्रह्मोस मिसाइल फैसिलिटी यहाँ अत्याधुनिक ब्रह्मोस नेक्स्ट-जेन मिसाइलों का उत्पादन कर रही है।
निवेश: इस नोड में ₹4,850 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
झांसी नोड:
विशेषज्ञता: विस्फोटक, और हेवी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए। प्रोपल्शन सिस्टम और भारी रक्षा विनिर्माण।
प्रमुख कंपनियां: भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) यहाँ मिसाइल और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए संयंत्र स्थापित कर रही है।
निवेश: यहाँ ₹12,190 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं। अलीगढ़ नोड:
विशेषज्ञता: ड्रोन निर्माण (UAVs), इलेक्ट्रॉनिक, सेंसर सिस्टम, वारफेयर सिस्टम और छोटे कलपुर्जे।
निवेश: इसमें ₹4,581करोड़ मूल्य के प्रस्ताव शामिल हैं। चित्रकूट नोड:
चित्रकूट नोड:
विशेषज्ञता: रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्ट्रोनिक्स, सिस्टम इंटीग्रेशन क्लस्टरऔर ।
निवेश: यहाँ ₹4,392 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर काम चल रहा है।
आगरा नोड:
विशेषज्ञता: विमानन कलपुर्जे और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति।
निवेश: इस नोड को ₹607 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्नाव नोड:
लखनऊ और कानपुर के मध्य उन्नाव को हाल ही में कॉरिडोर के 7वें नोड के रूप में विकसित करने की शुरुआती मंजूरी भी दी गई है।
औद्योगिक प्रगति और मुख्य आंकड़ेभूमि आवंटन: कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि में से 1,142 हेक्टेयर भूमि 65 से अधिक रक्षा उत्पादक कंपनियों को दी जा चुकी है।
संचालन: लगभग 7 बड़ी रक्षा विनिर्माण कंपनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि 47 से अधिक कंपनियों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
एमएसएमई को बढ़ावा: यह कॉरिडोर राज्य के मजबूत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आधार को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर आत्मनिर्भर बना रहा है।
आर्थिक लक्ष्य: यह परियोजना देश के ₹38,424 करोड़ (वर्ष 2025-26) के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात को गति दे रही है और यूपी को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में मदद कर रही
इस पहल के तहत राज्य में प्रमुख रक्षा क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं:
यह उत्तर प्रदेश को देश के बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है




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