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अमेठी गौरीगंज से 4 बार विधायक श्री तेजभान सिंह का निधन :शोक की लहर।

लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली
निधन की खबर से अमेठी सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
नेता प्रतिपक्ष लोकसभा राहुल गाधी, प्रियंका गाधी, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ने गहरा दुख व्यक्त किया
राजकीय सम्मान और गमगीन माहौल में समर्थकों व शुभचिंतकों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार
अस्थि कलश यात्रा भी पूरे सम्मान के साथ निकाली गई
कानपुर नगर: जुलाई 9, 2026
सोशल मीडिया पोस्ट से
सियासत का खेल 5 दिन
अमेठी के गौरीगंज की राजनीति में चार बार के विधायक रहे तेजभान सिंह का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर।
गौरीगंज के पूर्व विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता तेजभान सिंह का 83 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से अमेठी सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और आमजन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
तेजभान सिंह युवावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और बाद में जनसंघ तथा भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। विधानसभा 1977 में जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में गौरीगंज सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। तेजभान सिंह इसके बाद वर्ष 1991, 1993 और 1996 में भाजपा के टिकट पर गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधानसभा बने। जनता के बीच उनकी बड़ी लोकप्रियता थी।
गौरीगंज सहित पूरे अमेठी जनपद में प्रभावशाली नेता माने जाते थे, जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ हमेशा रहा।
दादा तेजभान सिंह मिलनसार स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और पारिवारिक संबंधों के कारण वह क्षेत्र की जनता के बीच "दादा" के नाम से लोकप्रिय थे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र और कल्याण सिंह से उनके घनिष्ठ संबंध रहे।
पूर्व विधायक तेजभान सिंह दल-बदल की राजनीति से दूरी बनाए रखे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई बगावती रुख नहीं अपनाया और संगठन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।
Shanu Shukla 5 दिन
#अमेठी - पूर्व विधायक दादा तेजभान का 83 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन पूर्व विधायक दादा तेजभान का 83 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
युवावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में जुड़े और बाद में जनसंघ तथा भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय हो गए।
वर्ष 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में गौरीगंज विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1991, 1993 और 1996 में गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक निर्वाचित हुए। अपने मिलनसार स्वभाव और पारिवारिक संबंधों के कारण क्षेत्र की जनता उन्हें स्नेहपूर्वक "दादा" कहकर पुकारती थी।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र और कल्याण सिंह से उनके घनिष्ठ संबंध रहे। दादा तेजभान ने कभी दल-बदल की राजनीति नहीं की। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई बगावत नहीं की। एक सामान्य कृषक परिवार में जन्मे दादा तेजभान लंबे समय तक अमेठी की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।
Hansraj Singh ·5 दिन ·
#अमेठी- राजनीति के एक युग का अंत ,बीजेपी के वरिष्ठ नेता दादा तेजभान सिंह का निधन।
गौरीगंज विधानसभा सीट से 4 बार पूर्व विधायक रह चुके हैं दादा तेजभान सिंह।
दादा तेजभान सिंह ने 80 वर्ष की आयु में लखनऊ के मैक्स हास्पिटल में ली अंतिम सांस।
अमेठी की राजनीति मे हुई अपूर्णीय क्षति, लम्बे समय से बीमार चल रहे थे पूर्व विधायक दादा तेज़भान सिंह।
बीजेपी के वरिष्ठ ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ नेता के जाने के बाद अमेठी मे फैली शोक की लहर।
अमेठी: जुलाई 9, 2026

अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से 4 बार विधायक रहे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री तेजभान सिंह (दादा तेजभान सिंह) का 83 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया है। उन्होंने लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली।
उनके निधन पर नेता प्रतिपक्ष लोकसभा राहुल गाधी, कान्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाधी, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा और पूर्व सांसद स्मृति ईरानी सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं और क्षेत्रीय नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए अपनी भावभीनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। अमेठी की गौरीगंज विधानसभा का वर्षों तक समर्पित भाव से प्रतिनिधित्व करने वाले, जनसेवा, सादगी एवं सामाजिक सरोकारों के पर्याय पूर्व विधायक श्री तेजभान सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।राजनीतिक सफ़र: वे गौरीगंज विधानसभा का वर्षों तक समर्पित भाव से प्रतिनिधित्व करने वाले एक बेहद लोकप्रिय और जमीन से जुड़े नेता थे। वे इस क्षेत्र से 4 बार विधायक चुने गए थे।
सादगी और जनसेवा के पर्याय: उन्हें पूरे क्षेत्र में उनकी सादगी, ईमानदारी, संघर्षशीलता और निस्वार्थ जनसेवा के लिए आदरपूर्वक 'दादा' कहकर पुकारा जाता था।
लोकतंत्र की रक्षा में योगदान: आपातकाल के दौरान उन्होंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया था।
अंतिम विदाई: उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास अचलपुर लाया गया, जहाँ पूरे राजकीय सम्मान और गमगीन माहौल में समर्थकों व शुभचिंतकों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हाल ही में उनकी अस्थि कलश यात्रा भी पूरे सम्मान के साथ निकाली गई।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार एवं उनके समस्त शुभचिंतकों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करें।

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