1943 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें पहली महिला कमांडर नियुक्त
आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी बनाया।
2002 में वे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार
'आर्ज़ी हुक़ूमत-ए-आज़ाद हिन्द' (अंतरिम सरकार) संस्थापक
Janbal 27 जून को 7:33 PM पर
क्या आप जानते हैं कि आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) की 'रानी झांसी रेजिमेंट' की कमान संभालने वाली कैप्टन लक्ष्मी सहगल (Captain Lakshmi Sahgal) ने आज़ादी के बाद भी देश की सेवा कैसे जारी रखी? 1943 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें पहली महिला कमांडर नियुक्त किया और फिर आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी बनाया। 2002 में वे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार भी बनी थीं। जानिए भारत की इस महान वीरांगना की अनसुनी और प्रेरक कहानी!
Kranti Kumar Katiyar
मेरे द्वारा 99 वर्षीया नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सहयोगिनी लेफ्टिनेंट मानवती आर्या के जीवन का अंतिम इंटरव्यू के संपादित अंश...... मेरा उनसे ये अंतिम साक्षात्कार भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार एवं दिल्ली सरकार ने अपने संग्रहालय में संरक्षित कर लिया है। सुनिए उनसे नेताजी के बारे में अनसुलझे रहस्य उनकी जुबानी..


Brahmans 23 जुलाई 2022
कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज की अधिकारी थीं। वह आजाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी रहीं। डॉक्टर लक्ष्मी सहगल का निधन 23 जुलाई, 2012 को हुआ था.
मेरा भारत महान
Lokesh Kushwaha ·20 जून को 3:56 PM पर ·
यह ऐतिहासिक तस्वीर वर्ष 1943 से 1945 के बीच (संभवतः जुलाई 1943 के बाद) की है, जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंचकर 'आजाद हिंद फौज' (INA) की कमान संभाली थी (वर्ष 1940 में नेताजी कोलकाता में नजरबंद थे)।
इस चित्र में अग्रिम पंक्ति के केंद्र में स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी अपने पूरे सैन्य गौरव के साथ खड़े हैं, और उनके ठीक बगल में सैन्य पोशाक में खड़ी महिला कैप्टन लक्ष्मी सहगल हैं, जो आजाद हिंद फौज की महिला विंग 'रानी झांसी रेजीमेंट' की कमांडर थीं। सिंगापुर या मलेशिया की किसी इमारत की सीढ़ियों पर ली गई इस तस्वीर में नेताजी के साथ उनके शीर्ष सैन्य अधिकारी और कोर कमांडर शामिल हैं, जिनमें कर्नल प्रेम कुमार सहगल, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों, मेजर जनरल जे.आर. भोंसले और नेताजी के करीबी सहयोगी कैप्टन 'सफरानी' (जिन्होंने 'जय हिंद' का नारा दिया था) नजर आ रहे हैं। यह दुर्लभ समूह चित्र भारत की पहली सशस्त्र संप्रभु सेना के उस स्वर्णिम कालखंड को दर्शाता है, जब इन जांबाज क्रांतिकारियों ने विदेशी धरती पर आजाद हिंद सरकार का गठन कर "दिल्ली चलो" और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" के नारों के साथ ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।
--- लोकेश कुशवाहा
कानपुर: जुलाई 16, 2026
23 जुलाई 2026 को भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी और आज़ाद हिंद फौज (INA) की पहली महिला कमांडर कैप्टन लक्ष्मी सहगल की 14वीं पुण्यतिथि है। उनका निधन 23 जुलाई 2012 को 97 वर्ष की आयु में कानपुर के एक अस्पताल में हुआ था।नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फ़ौज (इंडियन नेशनल आर्मी) ने भारत की स्वतंत्रता में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। 1943 में सिंगापुर से शुरू हुई इस सेना का मुख्य नारा "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" था, जिसने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल से जुड़ी मुख्य बातें:
झांसी रेजीमेंट की कमान: नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर वह आज़ाद हिंद फौज में शामिल हुईं और उन्होंने एशिया की पहली सर्व-महिला लड़ाकू इकाई 'रानी झांसी रेजीमेंट' का नेतृत्व किया।
आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के प्रमुख सेनानियों और विशेषताओं का विवरण इस प्रकार है:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: आज़ाद हिंद फ़ौज के सर्वोच्च कमांडर और 'आर्ज़ी हुक़ूमत-ए-आज़ाद हिन्द' (अंतरिम सरकार) के संस्थापक। उन्होंने देश के बाहर से ब्रिटिश हुकूमत को हिला दिया।
कैप्टन मोहन सिंह और रासबिहारी बोस: आज़ाद हिंद फ़ौज की नींव रखने वाले और इसके गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल: आज़ाद हिंद फ़ौज की 'रानी झाँसी रेजिमेंट' की प्रमुख कमांडर, जो दुनिया के पहले महिला सैन्य दस्तों में से एक था।
अन्य प्रमुख नायक: मेजर जनरल शाहनवाज ख़ाँ, कर्नल प्रेम सहगल और कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों, जिन पर 1945 में लाल किले में ऐतिहासिक मुकदमा चला था।
पेशे से डॉक्टर: उन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपनी MBBS की डिग्री पूरी की थी। सिंगापुर और बाद में कानपुर में उन्होंने जीवनभर गरीब मरीजों और शरणार्थियों का मुफ्त या बेहद कम फीस में इलाज किया। आज़ाद हिंद सरकार में मंत्री: वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अंतरिम आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की एकमात्र महिला मंत्री थीं।
राष्ट्रपति चुनाव (2002): वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में वह वामपंथी दलों की तरफ से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के खिलाफ एकमात्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरी थीं। सम्मान और समाज सेवा: भारत सरकार ने उन्हें 1998 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा था। उन्होंने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का इलाज करने के लिए डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व भी किया था।x
Janbal 27 जून को 7:33 PM पर
क्या आप जानते हैं कि आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) की 'रानी झांसी रेजिमेंट' की कमान संभालने वाली कैप्टन लक्ष्मी सहगल (Captain Lakshmi Sahgal) ने आज़ादी के बाद भी देश की सेवा कैसे जारी रखी? 1943 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें पहली महिला कमांडर नियुक्त किया और फिर आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी बनाया। 2002 में वे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार भी बनी थीं। जानिए भारत की इस महान वीरांगना की अनसुनी और प्रेरक कहानी!
Kranti Kumar Katiyar
मेरे द्वारा 99 वर्षीया नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सहयोगिनी लेफ्टिनेंट मानवती आर्या के जीवन का अंतिम इंटरव्यू के संपादित अंश...... मेरा उनसे ये अंतिम साक्षात्कार भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार एवं दिल्ली सरकार ने अपने संग्रहालय में संरक्षित कर लिया है। सुनिए उनसे नेताजी के बारे में अनसुलझे रहस्य उनकी जुबानी..


Brahmans 23 जुलाई 2022
कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज की अधिकारी थीं। वह आजाद हिंद सरकार में महिला मामलों की मंत्री भी रहीं। डॉक्टर लक्ष्मी सहगल का निधन 23 जुलाई, 2012 को हुआ था.
मेरा भारत महान
Lokesh Kushwaha ·20 जून को 3:56 PM पर ·
यह ऐतिहासिक तस्वीर वर्ष 1943 से 1945 के बीच (संभवतः जुलाई 1943 के बाद) की है, जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंचकर 'आजाद हिंद फौज' (INA) की कमान संभाली थी (वर्ष 1940 में नेताजी कोलकाता में नजरबंद थे)।
इस चित्र में अग्रिम पंक्ति के केंद्र में स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी अपने पूरे सैन्य गौरव के साथ खड़े हैं, और उनके ठीक बगल में सैन्य पोशाक में खड़ी महिला कैप्टन लक्ष्मी सहगल हैं, जो आजाद हिंद फौज की महिला विंग 'रानी झांसी रेजीमेंट' की कमांडर थीं। सिंगापुर या मलेशिया की किसी इमारत की सीढ़ियों पर ली गई इस तस्वीर में नेताजी के साथ उनके शीर्ष सैन्य अधिकारी और कोर कमांडर शामिल हैं, जिनमें कर्नल प्रेम कुमार सहगल, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों, मेजर जनरल जे.आर. भोंसले और नेताजी के करीबी सहयोगी कैप्टन 'सफरानी' (जिन्होंने 'जय हिंद' का नारा दिया था) नजर आ रहे हैं। यह दुर्लभ समूह चित्र भारत की पहली सशस्त्र संप्रभु सेना के उस स्वर्णिम कालखंड को दर्शाता है, जब इन जांबाज क्रांतिकारियों ने विदेशी धरती पर आजाद हिंद सरकार का गठन कर "दिल्ली चलो" और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" के नारों के साथ ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।
--- लोकेश कुशवाहा
कानपुर: जुलाई 16, 2026
23 जुलाई 2026 को भारत की महान स्वतंत्रता सेनानी और आज़ाद हिंद फौज (INA) की पहली महिला कमांडर कैप्टन लक्ष्मी सहगल की 14वीं पुण्यतिथि है। उनका निधन 23 जुलाई 2012 को 97 वर्ष की आयु में कानपुर के एक अस्पताल में हुआ था।नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फ़ौज (इंडियन नेशनल आर्मी) ने भारत की स्वतंत्रता में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। 1943 में सिंगापुर से शुरू हुई इस सेना का मुख्य नारा "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" था, जिसने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल से जुड़ी मुख्य बातें:
झांसी रेजीमेंट की कमान: नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर वह आज़ाद हिंद फौज में शामिल हुईं और उन्होंने एशिया की पहली सर्व-महिला लड़ाकू इकाई 'रानी झांसी रेजीमेंट' का नेतृत्व किया।
आज़ाद हिंद फ़ौज (INA) के प्रमुख सेनानियों और विशेषताओं का विवरण इस प्रकार है:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस: आज़ाद हिंद फ़ौज के सर्वोच्च कमांडर और 'आर्ज़ी हुक़ूमत-ए-आज़ाद हिन्द' (अंतरिम सरकार) के संस्थापक। उन्होंने देश के बाहर से ब्रिटिश हुकूमत को हिला दिया।
कैप्टन मोहन सिंह और रासबिहारी बोस: आज़ाद हिंद फ़ौज की नींव रखने वाले और इसके गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल: आज़ाद हिंद फ़ौज की 'रानी झाँसी रेजिमेंट' की प्रमुख कमांडर, जो दुनिया के पहले महिला सैन्य दस्तों में से एक था।
अन्य प्रमुख नायक: मेजर जनरल शाहनवाज ख़ाँ, कर्नल प्रेम सहगल और कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों, जिन पर 1945 में लाल किले में ऐतिहासिक मुकदमा चला था।
पेशे से डॉक्टर: उन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपनी MBBS की डिग्री पूरी की थी। सिंगापुर और बाद में कानपुर में उन्होंने जीवनभर गरीब मरीजों और शरणार्थियों का मुफ्त या बेहद कम फीस में इलाज किया। आज़ाद हिंद सरकार में मंत्री: वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अंतरिम आज़ाद हिंद सरकार में महिला मामलों की एकमात्र महिला मंत्री थीं।
राष्ट्रपति चुनाव (2002): वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में वह वामपंथी दलों की तरफ से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के खिलाफ एकमात्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरी थीं। सम्मान और समाज सेवा: भारत सरकार ने उन्हें 1998 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा था। उन्होंने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का इलाज करने के लिए डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व भी किया था।x




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