प्राचीन काल की मिट्टी की सुराही और एक विशिष्ट हैंडल वाली धूपदानी.
गांव के निवासी अशोक प्रताप मौर्य के पास से प्राचीन पुरावशेष और खिलौने 1985 से हैं
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ओई गांव में भारी बारिश के बाद जमीन धंसने से लगभग 2000 वर्ष पुराने (कुषाणकालीन) नगरीय अवशेष और प्राचीन ईंटों की दीवारें मिली हैं.
रायबरेली: 31 जुलाई 2026
कानपुर: 31 जुलाई 2026
इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज से जुड़े मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
खोज का स्थान और घटनास्थान: रायबरेली का हरचंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला ऐतिहासिक ओई गांव (ओई भीट).
कारण: जुलाई 2026 में हुई भारी बारिश के कारण एक निजी खेत (गुरुदेई के खेत) में अचानक 1 मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया, जिससे नीचे दबी प्राचीन संरचना दिखाई देने लगी.
प्रारंभिक अनुमान: ग्रामीणों ने इसे शुरुआत में एक "रहस्यमयी सुरंग" समझा था, लेकिन विशेषज्ञों की जांच में यह कुषाणकालीन पक्की ईंटों की प्राचीन दीवार और नगरीय संरचना साबित हुई है.
पुरातात्विक अवशेष और बरामदगी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) लखनऊ मंडल और स्थानीय प्रशासन की टीम ने सीढ़ी के सहारे खड्ड में उतरकर गहन निरीक्षण किया।
कानपुर: 31 जुलाई 2026
इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज से जुड़े मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
खोज का स्थान और घटनास्थान: रायबरेली का हरचंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला ऐतिहासिक ओई गांव (ओई भीट).
कारण: जुलाई 2026 में हुई भारी बारिश के कारण एक निजी खेत (गुरुदेई के खेत) में अचानक 1 मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया, जिससे नीचे दबी प्राचीन संरचना दिखाई देने लगी.
प्रारंभिक अनुमान: ग्रामीणों ने इसे शुरुआत में एक "रहस्यमयी सुरंग" समझा था, लेकिन विशेषज्ञों की जांच में यह कुषाणकालीन पक्की ईंटों की प्राचीन दीवार और नगरीय संरचना साबित हुई है.
पुरातात्विक अवशेष और बरामदगी
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) लखनऊ मंडल और स्थानीय प्रशासन की टीम ने सीढ़ी के सहारे खड्ड में उतरकर गहन निरीक्षण किया।
इस दौरान निम्नलिखित ऐतिहासिक वस्तुएं प्राप्त हुईं:पक्की ईंटों की दीवारें: कुषाण काल की विशिष्ट बड़ी ईंटें (लगभग 40x28x8 सेमी आकार की).
मिट्टी के बर्तन व कलाकृतियां: प्राचीन काल की मिट्टी की सुराही और एक विशिष्ट हैंडल वाली धूपदानी.
पुरानी सहेजी गई वस्तुएं: गांव के ही एक निवासी (अशोक प्रताप मौर्य) के पास से भी कई प्राचीन पुरावशेष और खिलौने मिले हैं, जिन्हें वे 1985 से सहेजकर रखे हुए थे।
वर्तमान स्थिति और आगे की योजनासुरक्षा व्यवस्था: ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए प्रशासन ने पूरे प्रभावित क्षेत्र को सील कर बैरिकेडिंग कर दी है और वहां पुलिस बल तैनात किया गया है.
शासन को रिपोर्ट: सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम इसकी विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज रही है.
पूर्ण खुदाई पर विचार: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन से अनुमति मिलती है, तो व्यवस्थित व्यापक खुदाई (Excavation) के बाद यहां 2,000 साल पुराना पूरा ऐतिहासिक नगर या बड़ी सभ्यता सामने आ सकती है।
मिट्टी के बर्तन व कलाकृतियां: प्राचीन काल की मिट्टी की सुराही और एक विशिष्ट हैंडल वाली धूपदानी.
पुरानी सहेजी गई वस्तुएं: गांव के ही एक निवासी (अशोक प्रताप मौर्य) के पास से भी कई प्राचीन पुरावशेष और खिलौने मिले हैं, जिन्हें वे 1985 से सहेजकर रखे हुए थे।
वर्तमान स्थिति और आगे की योजनासुरक्षा व्यवस्था: ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए प्रशासन ने पूरे प्रभावित क्षेत्र को सील कर बैरिकेडिंग कर दी है और वहां पुलिस बल तैनात किया गया है.
शासन को रिपोर्ट: सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम इसकी विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज रही है.
पूर्ण खुदाई पर विचार: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन से अनुमति मिलती है, तो व्यवस्थित व्यापक खुदाई (Excavation) के बाद यहां 2,000 साल पुराना पूरा ऐतिहासिक नगर या बड़ी सभ्यता सामने आ सकती है।




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