सरकारें विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलती हैं। बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए
आधिकारिक पत्र लिखकर मंदिर के संरक्षण और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने का अनुरोध
तकनीकी टीमों और मशीनों द्वारा कोशिशों के बाद 8 फीट ऊंची प्रतिमा को हिलाया नहीं जा सका।
भक्तों ने इसे एक "दैवीय चमत्कार" मानते हुए विरोध और तेज कर दिया है।
उज्जैन:10 सितम्बर 2026
उज्जैन के करीब 170 साल पुराने प्राचीन 'खड़े हनुमान मंदिर' को सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत हटाए जाने के विवाद में अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक आधिकारिक पत्र लिखकर मंदिर के संरक्षण और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने का अनुरोध किया है।
इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
उमा भारती के पत्र की बड़ी बातेंविकास और आस्था का संतुलन: उमा भारती ने अपने पत्र में अपील की है कि बीजेपी की सरकारें हमेशा विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलती हैं। इसलिए इस मामले में भी ऐसा बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए जिससे विकास कार्य भी न रुकें और मंदिर भी सुरक्षित रहे।
भोपाल की मस्जिद का उदाहरण: अपने सुझाव के समर्थन में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भोपाल में कमलापति पार्क (कमला पार्क) के सामने जब सड़क चौड़ीकरण का काम हो रहा था, तब वहां मौजूद एक मस्जिद को हटाए बिना, सड़क का प्लान बदलकर वैकल्पिक तरीके से निर्माण कराया गया था। उन्होंने उज्जैन में भी इसी तरह का प्लान बदलने का सुझाव दिया है।
सीएम के गृह नगर का हवाला: उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं उज्जैन के रहने वाले हैं, इसलिए वहां के धार्मिक स्थलों की गरिमा को उनसे बेहतर और कोई नहीं समझ सकता।
क्या है पूरा विवाद?
उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए कंठाल चौराहा से छत्री चौक/बड़ा सराफा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है।
मार्ग पर लगभग 170 वर्ष पुराना खड़े हनुमान जी का मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों द्वारा मंदिर को हटाने के प्रस्ताव का लगातार कड़ा विरोध किया जा रहा है।
प्रशासन द्वारा मंदिर के बाहरी ढांचे को तो हटा दिया गया, लेकिन तकनीकी टीमों और भारी मशीनों द्वारा काफी कोशिशों के बाद भी 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को अपनी जगह से हिलाया नहीं जा सका। इसके बाद भक्तों ने इसे एक "दैवीय चमत्कार" मानते हुए विरोध और तेज कर दिया है।




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