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दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चुनाव आयोग द्वारा नोटिस सामान्य सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के गणना फॉर्म में एक तार्किक विसंगति  पाई गई थी
भारत निर्वाचन आयोगके मानक संचालन प्रक्रिया  के तहत बूथ लेवल अधिकारी  मौके पर भौतिक सत्यापन किया। सीएम द्वारा सौंपे गए तथ्यों और दस्तावेज़ों की जांच के बाद प्रविष्टि को बिल्कुल सही और मान्य पाया गया। 
प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना 
नोटिस मिलने का मतलब किसी मतदाता को अयोग्य घोषित करना नहीं होता

कानपुर:19 सितम्बर 2026
नई दिल्ली: 19 सितम्बर 2026
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चुनाव आयोग द्वारा भेजा गया नोटिस एक सामान्य सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा था और अब उनके दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी वोटर एंट्री को पूरी तरह मान्य (Validate) कर दिया गया है। 
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के तहत शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा यह स्पष्टीकरण जारी किया गया। 
इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
नोटिस की वजह: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (जो शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र-14 की पंजीकृत मतदाता हैं) के गणना फॉर्म (Enumeration Form) में एक तार्किक विसंगति (Logical Discrepancy) पाई गई थी। उनके रिकॉर्ड में अभिभावक और उनके बीच उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम दर्ज था, जिसके कारण नियमों के तहत उन्हें नोटिस जारी हुआ था। 
फिजिकल वेरिफिकेशन और समाधान: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया। सीएम द्वारा सौंपे गए तथ्यों और दस्तावेज़ों की जांच के बाद उनकी प्रविष्टि को बिल्कुल सही और मान्य पाया गया। 
अंतिम वोटर लिस्ट: चुनाव आयोग के अनुसार, अब उनका नाम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे आगामी 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली फाइनल मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
एक व्यापक अभियान का हिस्सा: यह नोटिस सिर्फ मुख्यमंत्री को नहीं, बल्कि दिल्ली के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में शामिल करीब 33.13 लाख मतदाताओं को इसी प्रकार की तकनीकी कमियों या पुरानी मैपिंग न होने के कारण जारी किए गए हैं। इस सूची में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार समेत कई अन्य बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना है, और नोटिस मिलने का मतलब किसी मतदाता को अयोग्य घोषित करना नहीं होता। अधिक जानकारी के लिए आप ABP Live या Dainik Jagran की रिपोर्ट देख सकते हैं।
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