बड़े कार्य बहिष्कार के कारण अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पूरी तरह ठप
गुस्सा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और बार काउंसिल के हालिया कुछ फैसलों और नियमों के खिलाफ
दूर-दराज से आए वादकारियों (मुवक्किलों) को सिर्फ अगली तारीखें देकर वापस लौटाया जा रहा है.कानपुर:10 सितम्बर 2026
कानपुर बार एसोसिएशन और द लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर कानपुर और उत्तर प्रदेश के करीब 55 जिलों के अधिवक्ताओं ने 10 और 11 सितंबर 2026 को पूर्ण न्यायिक कार्य बंद (हड़ताल) रखा है.
कानपुर कचहरी में एक भव्य प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पूरे प्रदेश से हजारों वकील जुटे हैं. इस बड़े कार्य बहिष्कार के कारण अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पूरी तरह ठप है और दूर-दराज से आए वादकारियों (मुवक्किलों) को सिर्फ अगली तारीखें देकर वापस लौटाया जा रहा है.
वकील काम बंद करके किस बात का विरोध कर रहे हैं?
अधिवक्ताओं का यह गुस्सा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और बार काउंसिल के हालिया कुछ फैसलों और नियमों के खिलाफ है:
हड़ताल न करने की अंडरटेकिंग का विरोध: सुप्रीम कोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा वकीलों पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे भविष्य में हड़ताल न करने का लिखित हलफनामा (Undertaking) दें. वकीलों का कहना है कि यह उनकी स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और 'सत्याग्रह' करना उनका अधिकार है.
मुकदमों को गैर-जनपद ट्रांसफर करने का नियम: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले (मो. कफील बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) में निर्देश दिया था कि जिन वकीलों पर ऐसे मामलों में केस दर्ज हैं जिनमें 7 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनके मुकदमों का ट्रायल दूसरे जिलों में ट्रांसफर कर दिया जाए. वकील इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं.
लाइसेंस सस्पेंशन पर नाराजगी: वकीलों पर एफआईआर दर्ज होते ही उनका वकालत का लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया का भी विरोध हो रहा है. अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें क्या हैं?
इस प्रदेश स्तरीय सम्मेलन के माध्यम से वकील सरकार और प्रशासनिक संस्थाओं के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें रख रहे हैं:
अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम (Advocate Protection Act): संसद का विशेष सत्र बुलाकर देश और प्रदेश में वकीलों की सुरक्षा के लिए यह सख्त कानून तुरंत पास किया जाए.
कल्याणकारी निधि में बढ़ोतरी: उत्तर प्रदेश सरकार से मांग है कि अधिवक्ता कल्याण राशि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर ₹25 लाख किया जाए.
चेंबर और सुविधाएं: कानपुर और अन्य जिलों की कचरियों में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए व्यवस्थित चैंबर्स का निर्माण कराया जाए.
पेंशन और स्टाइपेंड: 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ वकीलों को पेंशन और नए युवा वकीलों को शुरुआती 5 साल तक भत्ता (Stipend) दिया जाए
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