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पुलिस ने जांच के दौरान आपको गिरफ्तार नहीं किया और जांच में पूरा सहयोग दिया: पुलिस को आपकी कस्टडी की जरूरत नहीं थी।

 सम्मन पर हाजिर होने वाले ऐसे आरोपियों को सीधे जेल  न भेजें।
उन पर जमानत अर्जी दाखिल करने का दबाव न बनाया जाए।
कोर्ट चाहे तो बाद में केवल आपकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती की मांग कर सकता है

 कानपुर: 15 सितम्बर 2026
इलाहाबाद:15 सितम्बर 2026
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्रीमती बच्छी देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध सतेंद्र कुमार अंतिल (Satender Kumar Antil) और सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Sidharth vs State of U.P.) मामलों के सिद्धांतों पर आधारित है।
इस फैसले के मुख्य बिंदु और नियम नीचे दिए गए हैं:
 फैसले के मुख्य नियम गिरफ्तारी के बिना चार्जशीट: यदि पुलिस ने जांच (Investigation) के दौरान आपको गिरफ्तार नहीं किया है और आपने जांच में पूरा सहयोग दिया है, तो इसका मतलब है कि पुलिस को आपकी कस्टडी की जरूरत नहीं थी। 
जमानत  की जरूरत नहीं: कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद जब आपको सम्मन (Summons) मिलता है, तो आपको नियमित जमानत (Regular Bail) या अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। 
निजी मुचलका : पहली तारीख पर कोर्ट में हाजिर होने पर अदालत आपको न्यायिक हिरासत (जेल) में नहीं भेजेगी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 91 (जो पहले CrPC की धारा 88 थी) के तहत कोर्ट केवल आपका व्यक्तिगत मुचलका (Personal Bond) लेकर आपको छोड़ देगी। 
आदेश की मुख्य बातें
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी जिला जजों और ट्रायल कोर्ट्स को कड़े निर्देश दिए हैं कि:
वे सम्मन पर हाजिर होने वाले ऐसे आरोपियों को सीधे जेल (Judicial Custody) न भेजें।
उन पर जमानत अर्जी दाखिल करने का दबाव न बनाया जाए।
कोर्ट चाहे तो बाद में केवल आपकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'Surety' (जमानती) की मांग कर सकता है,  पहली बार में मुचलके पर ही रिहा किया जाएगा।
यदि आपके पास सम्मन आया है और पुलिस ने पहले गिरफ्तार नहीं किया था, तो बिना किसी डर के पहली तारीख पर अपने वकील के माध्यम से या स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर इस जजमेंट का हवाला दे सकते हैं।
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