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राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज:31 अगस्त, 2026 : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ

आरोप यूके की  बंद कंपनी 'बैकऑप्स लिमिटेड' के दस्तावेजों पर आधारित था।
 भारतीय नागरिक  किसी अन्य देश की नागरिकता लेता, तो  भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
राहुल गांधी ने हमेशा स्पष्ट किया है वे केवल एक भारतीय नागरिक हैं और अन्य देश की नागरिकता नहीं ली 

कानपुर: 3 सितम्बर 2026
लखनऊ: 3 सितम्बर 2026
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वे केवल एक भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने कभी किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं ली है। भारतीय संसद और विभिन्न आधिकारिक मंचों पर उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया है। संसद की एथिक्स कमेटी और गृह मंत्रालय द्वारा पूर्व में दिए गए नोटिसों के जवाब में भी उन्होंने अपनी नागरिकता को लेकर उठने वाले सभी सवालों को सिरे से खारिज किया है। 
राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे विवाद और उस पर आए हालिया कानूनी फैसलों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
नागरिकता विवाद की मुख्य बातेंआरोप का आधार: विपक्ष और अन्य शिकायतकर्ताओं का आरोप यूके की एक बंद हो चुकी कंपनी 'बैकऑप्स लिमिटेड' (Backops Limited) के दस्तावेजों पर आधारित था। आरोप लगाया गया था कि 2003 से 2009 के बीच कंपनी के कुछ सालाना रिटर्न में राहुल गांधी की नागरिकता को 'ब्रिटिश' दर्शाया गया था।
राहुल गांधी का रुख: राहुल गांधी ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा है कि वे जन्म और निष्ठा से एक भारतीय नागरिक हैं। उन्होंने सरकार को यह चुनौती भी दी थी कि यदि उनके खिलाफ कोई वास्तविक सबूत हैं, तो वे इसकी जांच करा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2019): मई 2019 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से रोकने और उनकी नागरिकता पर सवाल उठाने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तत्कालीन याचिकाकर्ता से पूछा था कि सिर्फ किसी विदेशी कंपनी के कागजात में नाम होने से कोई व्यक्ति ब्रिटिश नागरिक कैसे बन सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का हालिया निर्णय (सितंबर 2026)
 राहुल गांधी की नागरिकता और रायबरेली से उनकी संसद सदस्यता को चुनौती देने वाली एक ताजा जनहित याचिका (PIL) पर न्यायपालिका का रुख पूरी तरह साफ हो गया है:
याचिका खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 31 अगस्त, 2026 को दिए अपने आदेश में राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
सबूतों का अभाव: जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने दावों के समर्थन में ब्रिटेन के आधिकारिक रिकॉर्ड या रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज का कोई भी ठोस या प्रामाणिक दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह असमर्थ रहे।
अदालत की टिप्पणी: अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना किसी दस्तावेजी सबूत के ऐसे गंभीर आरोप नहीं लगाए जा सकते, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। 
भारत का संविधान दोहरी नागरिकता  की अनुमति नहीं देता है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, राहुल गांधी के मामले में अदालतों ने बार-बार पाया है कि उनकी भारतीय नागरिकता के खिलाफ कोई भी कानूनी या प्रामाणिक सबूत मौजूद नहीं है
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