आकाश ने उनके द्वारा किए गए पोस्ट को रीपोस्ट (रीट्वीट) तक नहीं किया था।
ससुर के प्रति मोह और 'डबल माइंडेड' होने का आरोप
आंबेडकरवादी परंपरा में आंदोलन के लिए व्यक्तिगत हितों और रिश्तों का त्याग करना पड़ता है।
कानपुर: 10सितम्बर 2026
लखनऊ: 10 सितम्बर 2026बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 10 सितंबर 2026 को अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। मायावती ने सोशल मीडिया पर इसकी एक बड़ी वजह यह भी बताई कि आकाश ने उनके द्वारा किए गए पोस्ट को रीपोस्ट (रीट्वीट) तक नहीं किया था।
मायावती के इस कड़े फैसले और सोशल मीडिया पर उपजे इस विवाद के पीछे के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. ससुर के प्रति मोह और 'डबल माइंडेड' होने का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश आनंद पार्टी और दलित आंदोलन के हितों से ज्यादा अपने ससुर (अशोक सिद्धार्थ) और परिवार के रिश्तों को महत्व दे रहे हैं। उन्होंने आकाश को 'डबल माइंडेड' बताते हुए कहा कि रिश्ते-नातों का मोह उनके राजनीतिक करियर पर भारी पड़ रहा है।
2. पोस्ट को रीपोस्ट न करने पर नाराजगीदर असल, 2 अगस्त 2026 को मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से बाहर निकाला था।
इसके बाद, मायावती ने शर्त रखी थी कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें, तो वह आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारी दे सकती हैं।
अशोक सिद्धार्थ ने काफी देरी से राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया, जिसे मायावती ने बहुत देर से उठाया गया कदम बताया।
जब मायावती ने इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट साझा की, तो आकाश आनंद ने उस पोस्ट को रीपोस्ट नहीं किया। मायावती ने इसे अनुशासनहीनता और परिवार को पार्टी से ऊपर रखने का संकेत माना।
3. पार्टी से पूरी तरह 'मुक्त' करने का ऐलान
मायावती ने साफ़ कहा कि आंबेडकरवादी परंपरा में आंदोलन के लिए व्यक्तिगत हितों और रिश्तों का त्याग करना पड़ता है। उन्होंने घोषणा की कि वह आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह स्वतंत्र और मुक्त करती हैं
इसके तुरंत बाद आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुजन मिशन उनके लिए परिवार और पदों से ऊपर है, और यदि उनकी मौजूदगी मिशन को नुकसान पहुंचा रही है तो वे स्वेच्छा से हट रहे हैं। उन्होंने मान्यवर कांशीराम और बहन मायावती को अपना राजनीतिक गुरु बताया।



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