सिविल मामलों का मुख्य उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि अधिकारों का फैसला और विवादों का निपटारा
उपस्थित न होने पर प्रतिवादी को बहुत गंभीर कानूनी नुकसान उठाना पड़ता है,
डिक्री रद्द करते समय प्रतिवादी पर कुछ शर्तें: कोर्ट का खर्चा जमा करना या समय खराब करने का हर्जाना देना।
कानपुर:16 सितम्बर 2026
सिविल सूट (दीवानी मुकदमे) के सम्मन मिलने पर यदि प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे सीधे जेल या आपराधिक सजा का प्रावधान नहीं होता है।
सिविल मामलों का मुख्य उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि अधिकारों का फैसला और विवादों का निपटारा करना होता है。 उपस्थित न होने पर प्रतिवादी को बहुत गंभीर कानूनी नुकसान उठाना पड़ता है, जो किसी सजा से कम नहीं है। सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत इसके निम्नलिखित परिणाम होते हैं:
1. एकपक्षीय कार्यवाही (Ex-Parte Proceedings)
1. एकपक्षीय कार्यवाही (एकपक्षीय कार्यवाही)
यदि न्यायालय को यह संतुष्ट हो जाता है कि प्रतिवादी को सम्मन सही तरीके से मिल चुका है, फिर भी वह जानबूझकर उपस्थित नहीं हो रहा है, तो न्यायालय सीपीसी के आदेश 9, नियम 6 के तहत एकपक्षीय कार्यवाही का आदेश दे सकता है।
2. एकपक्षीय डिक्री / फैसला (Ex-Parte Decree)2. एकपक्षीय डिक्री/फैसला (एकपक्षीय डिक्री)2. एकपक्षीय फरमान। 2. एकपक्षीय डिक्री/निर्णय (एकपक्षीय डिक्री) अदालत केवल वादी की दलीलें और सबूत सुनेगी और प्रतिवादी की अनुपस्थिति में ही वादी के पक्ष में मुकदमे का फैसला सुना देगी। इससे प्रतिवादी बिना अपना पक्ष रखे ही मुकदमा हार जाता है।
3. वारंट और संपत्ति की कुर्की (विशेष परिस्थितियों में)
यदि अदालत ने प्रतिवादी को किसी विशिष्ट दस्तावेज या गवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से (In Person) हाजिर होने का सख्त आदेश दिया था और वह फिर भी नहीं आता है:आदेश 9 नियम 12 (Order IX Rule 12 CPC) के तहत न्यायालय सख्त कदम उठा सकता है।
अदालत प्रतिवादी के खिलाफ जमानती या गैर-जमानती वारंटजारी कर सकती है या उसकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दे सकती है।
4. कोर्ट की अवमानना
4. कोर्ट की अवमानना (न्यायालय की अवमानना)
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर और बार-बार अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाता है, तो कुछ मामलों में अदालत इसे न्यायालय की अवमानना मान सकती है, जिसके लिए जुर्माना या कुछ मामलों में सिविल जेल भी हो सकती है।
बचाव का रास्ता: यदि किसी वैध कारण (जैसे गंभीर बीमारी या दुर्घटना) से प्रतिवादी कोर्ट नहीं पहुंच पाया और एकपक्षीय आदेश हो गया, तो वह बाद में आदेश 9 नियम 13 (Order IX Rule 13 CPC) के तहत उस एकपक्षीय फैसले को रद्द (Set Aside) कराने के लिए उचित कारणों के साथ अदालत में आवेदन दे सकता है।
सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का आदेश 9, नियम 6 (Order 9, Rule 6) उस प्रक्रिया को निर्धारित करता है जब न्यायालय में सुनवाई के दौरान केवल वादी उपस्थित होता है और प्रतिवादी अनुपस्थित रहता है।
इस नियम के तहत, न्यायालय समनकी स्थिति के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रकार की कार्रवाइयाँ कर सकता है:
1. जब समन की तामीली ठीक से हो चुकी हो
यदि यह साबित हो जाता है कि प्रतिवादी को समन की सूचना कानूनी और सही तरीके से मिल चुकी थी, लेकिन फिर भी वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, तो न्यायालय वादी की दलीलें और साक्ष्य सुनकर मामले को एकपक्षीय (Ex-parte) आगे बढ़ाने का आदेश दे सकता है। इसके बाद कोर्ट एकपक्षीय डिक्री (Ex-parte Decree) भी पारित कर सकता है।
2. जब समन की तामीली ठीक से न हुई हो
यदि यह साबित नहीं हो पाता है कि प्रतिवादी को समन की तामीली सही तरीके से की गई थी, तो न्यायालय मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। ऐसी स्थिति में कोर्ट प्रतिवादी को दूसरा समन जारी करने और तामीली कराने का निर्देश देता है।
3. जब समन तो मिला हो, लेकिन पर्याप्त समय न हो
यदि प्रतिवादी को समन तो मिल गया था, लेकिन वह सुनवाई की तारीख से इतने कम समय पहले मिला कि उसे कोर्ट में उपस्थित होने या अपना जवाब तैयार करने का पर्याप्त समय नहीं मिला, तो न्यायालय सुनवाई को आगे की तारीख के लिए स्थगित (Postpone) कर देता है। इसके साथ ही, कोर्ट प्रतिवादी को अगली तारीख की सूचना देने का आदेश देता है।
वादी की गलती पर हर्जाना
यदि समन की तामीली न होने या देर से होने का मुख्य कारण वादी की लापरवाही या गलती (जैसे- समय पर फीस न देना या गलत पता देना) होती है, तो न्यायालय सुनवाई स्थगित करने के कारण लगने वाले खर्चे का भुगतान वादी को करने का आदेश दे सकता है。
प्रतिवादी के पास क्या विकल्प हैं?
यदि कोर्ट ने आदेश 9 नियम 6 के तहत एकपक्षीय कार्यवाही का आदेश दे दिया है, तो प्रतिवादी आदेश 9 नियम 7 के तहत आवेदन देकर उचित कारण बताते हुए उस आदेश को रद्द करवा सकता है और मुकदमे में वापस शामिल हो सकता है।
यदि मामला पूरी तरह तय होकर एकपक्षीय डिक्री पारित हो चुकी है, तो प्रतिवादी उसे निरस्त कराने के लिए आदेश 9 नियम 13 के तहत न्यायालय में आवेदन कर सकता है।
सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का आदेश 9, नियम 13 प्रतिवादी को एकपक्षीय डिक्री को निरस्त कराने का अधिकार देता है।
यदि कोर्ट ने आदेश 9 नियम 6 के तहत प्रतिवादी की अनुपस्थिति में वादी के पक्ष में फैसला (डिक्री) सुना दिया है, तो प्रतिवादी इस नियम के तहत उसी कोर्ट में आवेदन देकर उस फैसले को रद्द करने की मांग कर सकता है।
डिक्री रद्द करने के दो मुख्य आधार
न्यायालय एकपक्षीय डिक्री को तभी रद्द करेगा जब प्रतिवादी कोर्ट में निम्नलिखित कोई एक कारण साबित कर दे:
समन की तामीली ठीक से नहीं हुई थी: प्रतिवादी को अदालत का समन कानूनी रूप से मिला ही नहीं था, इसलिए उसे मामले की जानकारी नहीं हो सकी।
उपस्थित न होने का कोई पर्याप्त कारण : प्रतिवादी को समन तो मिल गया था, लेकिन सुनवाई के दिन कोर्ट में हाजिर न होने का कोई बेहद ठोस और जायज कारण था (जैसे- अचानक गंभीर बीमारी, दुर्घटना, या कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा जिस पर उसका नियंत्रण नहीं था)।
आवेदन करने की समय सीमा
इस नियम के तहत आवेदन करने के लिए 30 दिनों का समय मिलता है।
यह 30 दिन डिक्री पारित होने की तारीख से गिने जाते हैं।
यदि प्रतिवादी को समन तामील ही नहीं हुआ था, तो यह 30 दिन उस तारीख से गिने जाएंगे जब प्रतिवादी को उस डिक्री की जानकारी मिली।
महत्वपूर्ण नियम और शर्तें
तकनीकी कमियों पर राहत नहीं: यदि प्रतिवादी को समन की तामीली में कोई छोटी-मोटी तकनीकी त्रुटि हुई हो, लेकिन कोर्ट को यह संतुष्टि हो कि प्रतिवादी को सुनवाई की तारीख की पूरी जानकारी थी और उसके पास उपस्थित होने का पर्याप्त समय था, तो सिर्फ तकनीकी कमी के आधार पर डिक्री रद्द नहीं की जाएगी।
शर्तों के साथ बहाली: न्यायालय डिक्री रद्द करते समय प्रतिवादी पर कुछ शर्तें लगा सकता है, जैसे कि कोर्ट का खर्चा ) जमा करना या अदालती समय खराब करने का हर्जाना देना।
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उपस्थित न होने पर प्रतिवादी को बहुत गंभीर कानूनी नुकसान उठाना पड़ता है,
डिक्री रद्द करते समय प्रतिवादी पर कुछ शर्तें: कोर्ट का खर्चा जमा करना या समय खराब करने का हर्जाना देना।
कानपुर:16 सितम्बर 2026
सिविल सूट (दीवानी मुकदमे) के सम्मन मिलने पर यदि प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे सीधे जेल या आपराधिक सजा का प्रावधान नहीं होता है।
सिविल मामलों का मुख्य उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि अधिकारों का फैसला और विवादों का निपटारा करना होता है。 उपस्थित न होने पर प्रतिवादी को बहुत गंभीर कानूनी नुकसान उठाना पड़ता है, जो किसी सजा से कम नहीं है। सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत इसके निम्नलिखित परिणाम होते हैं:
1. एकपक्षीय कार्यवाही (Ex-Parte Proceedings)
1. एकपक्षीय कार्यवाही (एकपक्षीय कार्यवाही)
यदि न्यायालय को यह संतुष्ट हो जाता है कि प्रतिवादी को सम्मन सही तरीके से मिल चुका है, फिर भी वह जानबूझकर उपस्थित नहीं हो रहा है, तो न्यायालय सीपीसी के आदेश 9, नियम 6 के तहत एकपक्षीय कार्यवाही का आदेश दे सकता है।
2. एकपक्षीय डिक्री / फैसला (Ex-Parte Decree)2. एकपक्षीय डिक्री/फैसला (एकपक्षीय डिक्री)
3. वारंट और संपत्ति की कुर्की (विशेष परिस्थितियों में)
यदि अदालत ने प्रतिवादी को किसी विशिष्ट दस्तावेज या गवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से (In Person) हाजिर होने का सख्त आदेश दिया था और वह फिर भी नहीं आता है:आदेश 9 नियम 12 (Order IX Rule 12 CPC) के तहत न्यायालय सख्त कदम उठा सकता है।
अदालत प्रतिवादी के खिलाफ जमानती या गैर-जमानती वारंटजारी कर सकती है या उसकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दे सकती है।
4. कोर्ट की अवमानना
4. कोर्ट की अवमानना (न्यायालय की अवमानना)
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर और बार-बार अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाता है, तो कुछ मामलों में अदालत इसे न्यायालय की अवमानना मान सकती है, जिसके लिए जुर्माना या कुछ मामलों में सिविल जेल भी हो सकती है।
बचाव का रास्ता: यदि किसी वैध कारण (जैसे गंभीर बीमारी या दुर्घटना) से प्रतिवादी कोर्ट नहीं पहुंच पाया और एकपक्षीय आदेश हो गया, तो वह बाद में आदेश 9 नियम 13 (Order IX Rule 13 CPC) के तहत उस एकपक्षीय फैसले को रद्द (Set Aside) कराने के लिए उचित कारणों के साथ अदालत में आवेदन दे सकता है।
सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का आदेश 9, नियम 6 (Order 9, Rule 6) उस प्रक्रिया को निर्धारित करता है जब न्यायालय में सुनवाई के दौरान केवल वादी उपस्थित होता है और प्रतिवादी अनुपस्थित रहता है।
इस नियम के तहत, न्यायालय समनकी स्थिति के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रकार की कार्रवाइयाँ कर सकता है:
1. जब समन की तामीली ठीक से हो चुकी हो
यदि यह साबित हो जाता है कि प्रतिवादी को समन की सूचना कानूनी और सही तरीके से मिल चुकी थी, लेकिन फिर भी वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ, तो न्यायालय वादी की दलीलें और साक्ष्य सुनकर मामले को एकपक्षीय (Ex-parte) आगे बढ़ाने का आदेश दे सकता है। इसके बाद कोर्ट एकपक्षीय डिक्री (Ex-parte Decree) भी पारित कर सकता है।
2. जब समन की तामीली ठीक से न हुई हो
यदि यह साबित नहीं हो पाता है कि प्रतिवादी को समन की तामीली सही तरीके से की गई थी, तो न्यायालय मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा। ऐसी स्थिति में कोर्ट प्रतिवादी को दूसरा समन जारी करने और तामीली कराने का निर्देश देता है।
3. जब समन तो मिला हो, लेकिन पर्याप्त समय न हो
यदि प्रतिवादी को समन तो मिल गया था, लेकिन वह सुनवाई की तारीख से इतने कम समय पहले मिला कि उसे कोर्ट में उपस्थित होने या अपना जवाब तैयार करने का पर्याप्त समय नहीं मिला, तो न्यायालय सुनवाई को आगे की तारीख के लिए स्थगित (Postpone) कर देता है। इसके साथ ही, कोर्ट प्रतिवादी को अगली तारीख की सूचना देने का आदेश देता है।
वादी की गलती पर हर्जाना
यदि समन की तामीली न होने या देर से होने का मुख्य कारण वादी की लापरवाही या गलती (जैसे- समय पर फीस न देना या गलत पता देना) होती है, तो न्यायालय सुनवाई स्थगित करने के कारण लगने वाले खर्चे का भुगतान वादी को करने का आदेश दे सकता है。
प्रतिवादी के पास क्या विकल्प हैं?
यदि कोर्ट ने आदेश 9 नियम 6 के तहत एकपक्षीय कार्यवाही का आदेश दे दिया है, तो प्रतिवादी आदेश 9 नियम 7 के तहत आवेदन देकर उचित कारण बताते हुए उस आदेश को रद्द करवा सकता है और मुकदमे में वापस शामिल हो सकता है।
यदि मामला पूरी तरह तय होकर एकपक्षीय डिक्री पारित हो चुकी है, तो प्रतिवादी उसे निरस्त कराने के लिए आदेश 9 नियम 13 के तहत न्यायालय में आवेदन कर सकता है।
सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का आदेश 9, नियम 13 प्रतिवादी को एकपक्षीय डिक्री को निरस्त कराने का अधिकार देता है।
यदि कोर्ट ने आदेश 9 नियम 6 के तहत प्रतिवादी की अनुपस्थिति में वादी के पक्ष में फैसला (डिक्री) सुना दिया है, तो प्रतिवादी इस नियम के तहत उसी कोर्ट में आवेदन देकर उस फैसले को रद्द करने की मांग कर सकता है।
डिक्री रद्द करने के दो मुख्य आधार
न्यायालय एकपक्षीय डिक्री को तभी रद्द करेगा जब प्रतिवादी कोर्ट में निम्नलिखित कोई एक कारण साबित कर दे:
समन की तामीली ठीक से नहीं हुई थी: प्रतिवादी को अदालत का समन कानूनी रूप से मिला ही नहीं था, इसलिए उसे मामले की जानकारी नहीं हो सकी।
उपस्थित न होने का कोई पर्याप्त कारण : प्रतिवादी को समन तो मिल गया था, लेकिन सुनवाई के दिन कोर्ट में हाजिर न होने का कोई बेहद ठोस और जायज कारण था (जैसे- अचानक गंभीर बीमारी, दुर्घटना, या कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा जिस पर उसका नियंत्रण नहीं था)।
आवेदन करने की समय सीमा
इस नियम के तहत आवेदन करने के लिए 30 दिनों का समय मिलता है।
यह 30 दिन डिक्री पारित होने की तारीख से गिने जाते हैं।
यदि प्रतिवादी को समन तामील ही नहीं हुआ था, तो यह 30 दिन उस तारीख से गिने जाएंगे जब प्रतिवादी को उस डिक्री की जानकारी मिली।
महत्वपूर्ण नियम और शर्तें
तकनीकी कमियों पर राहत नहीं: यदि प्रतिवादी को समन की तामीली में कोई छोटी-मोटी तकनीकी त्रुटि हुई हो, लेकिन कोर्ट को यह संतुष्टि हो कि प्रतिवादी को सुनवाई की तारीख की पूरी जानकारी थी और उसके पास उपस्थित होने का पर्याप्त समय था, तो सिर्फ तकनीकी कमी के आधार पर डिक्री रद्द नहीं की जाएगी।
शर्तों के साथ बहाली: न्यायालय डिक्री रद्द करते समय प्रतिवादी पर कुछ शर्तें लगा सकता है, जैसे कि कोर्ट का खर्चा ) जमा करना या अदालती समय खराब करने का हर्जाना देना।
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