जिलाधिकारी, अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने RTO ऑफिस में की औचक छापेमारी
भ्रष्टाचार के खेल में शामिल 15 संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।कानपुर: 2 सितम्बर 2026
कानपुर संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए शासन ने एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार और एआरटीओ प्रवर्तन (तृतीय दल) सोमलता यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
इस कार्रवाई से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
निलंबन की मुख्य वजहेंऔचक निरीक्षण:
जिलाधिकारी, अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कानपुर RTO ऑफिस में औचक छापेमारी की थी। अवैध वसूली: जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के सबूत मिले।
बाहरी लोगों का दखल: कार्यालय में अनधिकृत (बाहरी) लोगों से सरकारी काम कराने की पुष्टि हुई।
लापरवाही: दोनों अधिकारियों पर अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण न रखने और कार्यालय की गतिविधियों की सही निगरानी न करने का दोषी पाया गया है।
की गई अन्य कार्रवाइयाँ मुख्यालय से संबद्ध: निलंबन की अवधि के दौरान दोनों एआरटीओ को परिवहन विभाग के मुख्यालय (लखनऊ) से संबद्ध किया गया है, जहाँ उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
विभागीय जांच: इस पूरे मामले की जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
FIR दर्ज: इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल 15 संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज की गई है।
RTO को नोटिस: संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) राकेन्द्र सिंह को भी उनके ढीले नियंत्रण के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।




0 Comments