इस साल 80 से अधिक देशों के खरीदार और प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
"उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति-2022" के तहत आकर्षित करने के लिए वित्तीय और ढांचागत प्रोत्साहन
कारीगर और उद्यमी योजनाओं और आगामी व्यापार संस्करणों के लिए मुफ्त पंजीकरण कर सकते हैं।
प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों की प्रदर्शनियाँ सांस्कृतिक गौरव और बेहतरीन शिल्पकला की अद्भुत मिसालकानपुर:26 सितम्बर 2026
ग्रेटर नोएडा::26 सितम्बर 2026
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण राज्य के उत्पादों और एमएसएमई (MSME) इकाइयों को वैश्विक पहचान दिलाने का एक बेहतरीन मंच बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री राकेश सचान ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान इसके महत्व को रेखांकित किया।
मंत्री राकेश सचान के वक्तव्य और इस वर्ष के ट्रेड शो की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच: राकेश सचान ने कहा कि यह ट्रेड शो देश और दुनिया के लोगों को यूपी के कारोबार से जोड़ने का एक महा-मंच बन चुका है। इस साल 80 से अधिक देशों के खरीदार और प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
MSME और ODOP को बढ़ावा: इस आयोजन के माध्यम से राज्य की कई एमएसएमई (MSME) इकाइयों और एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) के कारीगरों को अपने अनोखे उत्पादों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने का सीधा अवसर मिल रहा है।
पार्टनर देश (Partner Countries): इस चौथे संस्करण में वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस जैसे देश पार्टनर कंट्री के तौर पर शामिल हुए हैं।
व्यापक सहभागिता: इस बार ट्रेड शो में सभी प्रमुख विभागों के सहयोग से आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं और इसमें 5 लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद जताई गई है।
हथकरघा विरासत और पारंपरिक शिल्प, जमीनी स्तर के बुनकरों और स्थानीय कारीगरों को सीधे सुर्खियों में लाते हैं।
उद्योग नवाचार को बढ़ावा देना: यह कपड़ा निर्माण में राज्य के नवीनतम तकनीकी नवाचारों और आधुनिक प्रगति को प्रदर्शित करता है, यह साबित करता है कि आधुनिक बाजार की मांगों के साथ पारंपरिक तरीके कैसे विकसित हो रहे हैं।
वैश्विक बाजार विस्तार: यूपीआईटीएस 2026 सक्रिय रूप से स्थानीय सूक्ष्म उद्यमियों और वैश्विक बाजारों के बीच अंतर को पाट रहा है, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए यूपी-आधारित व्यवसायों के साथ सहयोग करने के लिए एक मजबूत मंच तैयार हो रहा है।
नीति और विकास सेमिनार: मंडप एक सूचना केंद्र के रूप में कार्य करता है जो उत्तर प्रदेश की आकर्षक कपड़ा नीतियों, आकर्षक निवेश के अवसरों और राज्य में नए व्यवसायों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए विकासात्मक रोडमैप पर प्रकाश डालता है।
वाराणसी सिल्क (बनारसी साड़ी) और लखनऊ चिकनकारी जैसे भारत के विशिष्ट हथकरघा क्लस्टर, विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख प्रदर्शन स्थलों जैसे भारत मंडपम (नई दिल्ली) और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध इंटरनेशनल ट्रेड शो के विशेष मंडपों (पवेलियन) में प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए हैं।
इन प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों की प्रदर्शनियाँ हमारे सांस्कृतिक गौरव और बेहतरीन शिल्पकला की अद्भुत मिसाल पेश करती हैं:
प्रमुख हथकरघा क्लस्टर और उनकी विशेषताएँ
वाराणसी सिल्क क्लस्टर (बनारसी साड़ी): वाराणसी दुनिया का सबसे बड़ा हथकरघा बुनाई (Handloom Weaving) क्लस्टर माना जाता है। यहाँ की बनारसी रेशमी साड़ियों और ब्रोकेड (किमखाब) पर सोने और चांदी के धागों (जरी) से बेहद जटिल बुनाई की जाती है। मंडपों में इन उत्कृष्ट वस्त्रों को बनाने की पारंपरिक तकनीक और उत्कृष्ट 'जीआई-टैग' (GI-Tagged) प्राप्त डिज़ाइनों को विश्व पटल पर प्रदर्शित किया जाता है।
लखनऊ चिकनकारी क्लस्टर: अवध की नवाबों की विरासत और 200 साल से भी अधिक पुरानी इस कला को 'छाया कला' (Shadow Work) भी कहा जाता है। महीन मलमल या सूती कपड़े पर सफेद धागे से की जाने वाली यह नाजुक सुई की कढ़ाई अपनी शाश्वत सुंदरता और कोमलता के लिए प्रसिद्ध है। मंडपों में इसके विभिन्न प्रकार के टांके (जैसे मुर्री, फंदा, कील कंगन) और इसके आधुनिक डिजाइनों को भव्य रूप से दर्शाया जाता है।
इन मंडपों का मुख्य उद्देश्य और प्रभाव'एक जनपद-एक उत्पाद' (ODOP) का प्रोत्साहन: उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार की पहलों के तहत इन विशिष्ट क्लस्टरों को विशेष मंडपों में अलग से जगह दी जाती है ताकि स्थानीय कारीगरों को सीधे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदार (Buyers) मिल सकें।
लाइव बुनाई का प्रदर्शन: कई प्रदर्शनियों के दौरान मंडप में पारंपरिक हथकरघा (Handloom Machines) लगाए जाते हैं, जहाँ बुनकर और शिल्पकार लाइव कला का प्रदर्शन करते हैं, जिससे आगंतुक भारतीय वस्त्रों के बनने की पेचीदा प्रक्रिया को लाइव देख पाते हैं।
वैश्विक पहचान: भारत मंडपम जैसे आधुनिक स्थलों पर आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन या उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों ने बनारसी सिल्क और लखनवी चिकनकारी को एक प्रीमियम और टिकाऊ (Sustainable) फैशन ब्रांड के रूप में स्थापित किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार की वर्तमान "उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति-2022" (UP Textile & Garmenting Policy 2022) के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के आकर्षक वित्तीय और ढांचागत (Infrastructure) प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। हाल ही में आयोजित UP TEX 2026 सम्मेलन के दौरान भी राज्य सरकार ने इस नीति के तहत बड़े स्तर पर निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
इस नीति के तहत उपलब्ध प्रमुख निवेश प्रोत्साहन और सब्सिडी नीचे दी गई हैं:
वित्तीय और पूंजीगत प्रोत्साहन (Financial Incentives)पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy): प्लांट और मशीनरी की खरीद पर 25% तक की पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है (उन इकाइयों के लिए जो न्यूनतम 50 लोगों को रोजगार देती हैं)। इसकी अधिकतम सीमा ₹100 करोड़ प्रति इकाई है।
क्षेत्रीय अतिरिक्त लाभ: यदि कोई उद्योग राज्य के पिछड़े क्षेत्रों जैसे पूर्वांचल या बुंदेलखंड में लगाया जाता है, तो 10% की अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी (कुल 35%) प्रदान की जाती है।
ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy): बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण के वार्षिक ब्याज पर 7 वर्षों तक 60% की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाती है। इसकी अधिकतम सीमा ₹1.5 करोड़ प्रति वर्ष (गौतम बुद्ध नगर के लिए ₹75 लाख/वर्ष) है।
भूमि और बुनियादी ढांचा सहायता (Land & Infrastructure Support)भूमि लागत सब्सिडी: सरकारी एजेंसियों या औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से भूमि खरीदने पर 25% भूमि लागत की प्रतिपूर्ति की जाती है। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जिले में यह छूट 15% है। (यह सब्सिडी कुल परियोजना लागत के अधिकतम 10% तक सीमित है)।
स्टांप ड्यूटी में 100% छूट: राज्य के अधिकांश जिलों में कपड़ा उद्योग लगाने के लिए भूमि खरीदने पर 100% स्टांप शुल्क छूट मिलती है। (गौतम बुद्ध नगर में यह छूट 75% है)।
निजी टेक्सटाइल पार्क के लिए मदद: यदि कोई डेवलपर कम से कम 25 एकड़ में प्राइवेट टेक्सटाइल या अपैरल पार्क विकसित करता है, तो उसे परियोजना लागत (भूमि की लागत को छोड़कर) की 50% वित्तीय सहायता (अधिकतम ₹50 करोड़) दी जाती है।
संचालन और रोजगार प्रोत्साहन (Operational & Employment Support)रोजगार सृजन सब्सिडी (Employment Subsidy): मेगा और सुपर मेगा गारमेंटिंग इकाइयों को (गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) ₹3,200 प्रति श्रमिक प्रति माह की सब्सिडी 5 वर्षों के लिए दी जाती है।
बिजली शुल्क में छूट: उद्योगों को 100% बिजली शुल्क (Electricity Duty) की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क (PM MITRA Park) की इकाइयों को ₹2 प्रति यूनिट की अतिरिक्त बिजली सब्सिडी भी मिलती है।
इन-हाउस इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान: स्किल ट्रेनिंग सेंटर, टेस्टिंग लैब, क्वालिटी सर्टिफिकेशन लैब या अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र स्थापित करने के लिए कुल लागत की 25% सब्सिडी (अधिकतम ₹2.5 करोड़) मिलती है। युवाओं और छोटे बुनकरों के लिए विशेष योजनाएंयुवा स्वरोजगार सहायता: 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को हैंडलूम (₹5-20 लाख), पावरलूम (₹5-10 लाख), डिजाइन स्टूडियो (₹30 लाख) और एक्सपोर्ट हाउस (₹20 लाख) जैसी परियोजनाएं शुरू करने के लिए 75% तक की प्रतिपूर्ति दी जाती है।
रेशम उद्योग (Silk Industry) संवर्धन: सेरीकल्चर (रेशम कीट पालन और कताई) में ₹1 करोड़ तक के निवेश पर 15% पूंजी सब्सिडी (SC/ST उद्यमियों के लिए 20%) मिलती है।
है
कारीगर और उद्यमी अपने व्यवसाय को सरकारी योजनाओं और आगामी व्यापार संस्करणों (Exhibitions/Trade Fairs) में शामिल करने के लिए भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर बिल्कुल मुफ्त पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए सरकार का Udyam Registration Portal काम करता है, जो MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के तहत आपके व्यवसाय को पंजीकृत करता है।
पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया:
आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड (जो मोबाइल नंबर से लिंक हो)
पैन (PAN) कार्ड और व्यवसाय का बैंक खाता विवरण (सेविंग या करंट)
पंजीकरण करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया: सबसे पहले आधिकारिक सरकारी वेबसाइट Udyam Registration पर जाएं और होमपेज पर "For New Entrepreneurs" वाले विकल्प को चुनें।
आधार सत्यापन: अपना 12 अंकों का आधार नंबर और अपना नाम (जैसा आधार में दर्ज है) भरें, फिर "Validate & Generate OTP" पर क्लिक करें। आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP को दर्ज कर सत्यापित करें।
संगठन का प्रकार और पैन सत्यापन: इसके बाद अपने व्यवसाय का प्रकार (जैसे- प्रोपराइटरशिप/एकल स्वामित्व, पार्टनरशिप आदि) चुनें और अपना पैन (PAN) नंबर डालकर उसे वैलिडेट करें।
व्यवसाय का विवरण भरें: अब फॉर्म में अपने उद्योग/दुकान का नाम, प्लांट/इकाई का पता, मोबाइल नंबर, ईमेल और बैंक खाता नंबर (IFSC कोड के साथ) जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज करें।
गतिविधि का चयन (Major Activity): यहाँ आपको चुनना होगा कि आपका व्यवसाय मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) है या सर्विस (सेवा)। हस्तशिल्प और कारीगरी से जुड़े लोग मैन्युफैक्चरिंग या संबंधित सर्विस कोड को चुन सकते हैं।
निवेश और टर्नओवर: अपने व्यवसाय में लगी कुल पूंजी (इन्वेस्टमेंट) और सालाना टर्नओवर की जानकारी भरें (यह डेटा आपके आईटीआर/जीएसटी से भी ऑटो-लिंक हो जाता है)।
अंतिम सबमिशन: पूरी जानकारी जांचने के बाद "Submit and Get Final OTP" पर क्लिक करें। OTP दर्ज करते ही आपका पंजीकरण पूरा हो जाएगा।
पंजीकरण के बाद व्यापार संस्करणों (Trade Editions) के लिए लाभ
पंजीकरण पूरा होते ही आपको एक स्थायी उद्यम पंजीकरण संख्या (URN) और एक डिजिटल उद्यम प्रमाण पत्र (Udyam Certificate) मिल जाते हैं। इसके जरिए आप:सरकार द्वारा आयोजित होने वाले आगामी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों (Trade Fairs/Exhibitions) में स्टॉल बुक करने के लिए पात्र हो जाते हैं।
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए मिलने वाली सरकारी सब्सिडी, कम ब्याज पर लोन और टेंडरों में प्राथमिकता का लाभ उठा सकते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए किसी भौतिक दस्तावेज को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होती है। आपके पास केवल ये दो विवरण होने चाहिए:
"उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति-2022" के तहत आकर्षित करने के लिए वित्तीय और ढांचागत प्रोत्साहन
कारीगर और उद्यमी योजनाओं और आगामी व्यापार संस्करणों के लिए मुफ्त पंजीकरण कर सकते हैं।
प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों की प्रदर्शनियाँ सांस्कृतिक गौरव और बेहतरीन शिल्पकला की अद्भुत मिसालकानपुर:26 सितम्बर 2026
ग्रेटर नोएडा::26 सितम्बर 2026
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण राज्य के उत्पादों और एमएसएमई (MSME) इकाइयों को वैश्विक पहचान दिलाने का एक बेहतरीन मंच बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री राकेश सचान ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान इसके महत्व को रेखांकित किया।
मंत्री राकेश सचान के वक्तव्य और इस वर्ष के ट्रेड शो की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच: राकेश सचान ने कहा कि यह ट्रेड शो देश और दुनिया के लोगों को यूपी के कारोबार से जोड़ने का एक महा-मंच बन चुका है। इस साल 80 से अधिक देशों के खरीदार और प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
MSME और ODOP को बढ़ावा: इस आयोजन के माध्यम से राज्य की कई एमएसएमई (MSME) इकाइयों और एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) के कारीगरों को अपने अनोखे उत्पादों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने का सीधा अवसर मिल रहा है।
पार्टनर देश (Partner Countries): इस चौथे संस्करण में वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस जैसे देश पार्टनर कंट्री के तौर पर शामिल हुए हैं।
व्यापक सहभागिता: इस बार ट्रेड शो में सभी प्रमुख विभागों के सहयोग से आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं और इसमें 5 लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद जताई गई है।
हथकरघा विरासत और पारंपरिक शिल्प, जमीनी स्तर के बुनकरों और स्थानीय कारीगरों को सीधे सुर्खियों में लाते हैं।
उद्योग नवाचार को बढ़ावा देना: यह कपड़ा निर्माण में राज्य के नवीनतम तकनीकी नवाचारों और आधुनिक प्रगति को प्रदर्शित करता है, यह साबित करता है कि आधुनिक बाजार की मांगों के साथ पारंपरिक तरीके कैसे विकसित हो रहे हैं।
वैश्विक बाजार विस्तार: यूपीआईटीएस 2026 सक्रिय रूप से स्थानीय सूक्ष्म उद्यमियों और वैश्विक बाजारों के बीच अंतर को पाट रहा है, जिससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए यूपी-आधारित व्यवसायों के साथ सहयोग करने के लिए एक मजबूत मंच तैयार हो रहा है।
नीति और विकास सेमिनार: मंडप एक सूचना केंद्र के रूप में कार्य करता है जो उत्तर प्रदेश की आकर्षक कपड़ा नीतियों, आकर्षक निवेश के अवसरों और राज्य में नए व्यवसायों को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए विकासात्मक रोडमैप पर प्रकाश डालता है।
वाराणसी सिल्क (बनारसी साड़ी) और लखनऊ चिकनकारी जैसे भारत के विशिष्ट हथकरघा क्लस्टर, विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख प्रदर्शन स्थलों जैसे भारत मंडपम (नई दिल्ली) और उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध इंटरनेशनल ट्रेड शो के विशेष मंडपों (पवेलियन) में प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए हैं।
इन प्रमुख हथकरघा क्लस्टरों की प्रदर्शनियाँ हमारे सांस्कृतिक गौरव और बेहतरीन शिल्पकला की अद्भुत मिसाल पेश करती हैं:
प्रमुख हथकरघा क्लस्टर और उनकी विशेषताएँ
वाराणसी सिल्क क्लस्टर (बनारसी साड़ी): वाराणसी दुनिया का सबसे बड़ा हथकरघा बुनाई (Handloom Weaving) क्लस्टर माना जाता है। यहाँ की बनारसी रेशमी साड़ियों और ब्रोकेड (किमखाब) पर सोने और चांदी के धागों (जरी) से बेहद जटिल बुनाई की जाती है। मंडपों में इन उत्कृष्ट वस्त्रों को बनाने की पारंपरिक तकनीक और उत्कृष्ट 'जीआई-टैग' (GI-Tagged) प्राप्त डिज़ाइनों को विश्व पटल पर प्रदर्शित किया जाता है।
लखनऊ चिकनकारी क्लस्टर: अवध की नवाबों की विरासत और 200 साल से भी अधिक पुरानी इस कला को 'छाया कला' (Shadow Work) भी कहा जाता है। महीन मलमल या सूती कपड़े पर सफेद धागे से की जाने वाली यह नाजुक सुई की कढ़ाई अपनी शाश्वत सुंदरता और कोमलता के लिए प्रसिद्ध है। मंडपों में इसके विभिन्न प्रकार के टांके (जैसे मुर्री, फंदा, कील कंगन) और इसके आधुनिक डिजाइनों को भव्य रूप से दर्शाया जाता है।
इन मंडपों का मुख्य उद्देश्य और प्रभाव'एक जनपद-एक उत्पाद' (ODOP) का प्रोत्साहन: उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार की पहलों के तहत इन विशिष्ट क्लस्टरों को विशेष मंडपों में अलग से जगह दी जाती है ताकि स्थानीय कारीगरों को सीधे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदार (Buyers) मिल सकें।
लाइव बुनाई का प्रदर्शन: कई प्रदर्शनियों के दौरान मंडप में पारंपरिक हथकरघा (Handloom Machines) लगाए जाते हैं, जहाँ बुनकर और शिल्पकार लाइव कला का प्रदर्शन करते हैं, जिससे आगंतुक भारतीय वस्त्रों के बनने की पेचीदा प्रक्रिया को लाइव देख पाते हैं।
वैश्विक पहचान: भारत मंडपम जैसे आधुनिक स्थलों पर आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन या उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंचों ने बनारसी सिल्क और लखनवी चिकनकारी को एक प्रीमियम और टिकाऊ (Sustainable) फैशन ब्रांड के रूप में स्थापित किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार की वर्तमान "उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति-2022" (UP Textile & Garmenting Policy 2022) के तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के आकर्षक वित्तीय और ढांचागत (Infrastructure) प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। हाल ही में आयोजित UP TEX 2026 सम्मेलन के दौरान भी राज्य सरकार ने इस नीति के तहत बड़े स्तर पर निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
इस नीति के तहत उपलब्ध प्रमुख निवेश प्रोत्साहन और सब्सिडी नीचे दी गई हैं:
वित्तीय और पूंजीगत प्रोत्साहन (Financial Incentives)पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy): प्लांट और मशीनरी की खरीद पर 25% तक की पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है (उन इकाइयों के लिए जो न्यूनतम 50 लोगों को रोजगार देती हैं)। इसकी अधिकतम सीमा ₹100 करोड़ प्रति इकाई है।
क्षेत्रीय अतिरिक्त लाभ: यदि कोई उद्योग राज्य के पिछड़े क्षेत्रों जैसे पूर्वांचल या बुंदेलखंड में लगाया जाता है, तो 10% की अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी (कुल 35%) प्रदान की जाती है।
ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy): बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण के वार्षिक ब्याज पर 7 वर्षों तक 60% की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाती है। इसकी अधिकतम सीमा ₹1.5 करोड़ प्रति वर्ष (गौतम बुद्ध नगर के लिए ₹75 लाख/वर्ष) है।
भूमि और बुनियादी ढांचा सहायता (Land & Infrastructure Support)भूमि लागत सब्सिडी: सरकारी एजेंसियों या औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से भूमि खरीदने पर 25% भूमि लागत की प्रतिपूर्ति की जाती है। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जिले में यह छूट 15% है। (यह सब्सिडी कुल परियोजना लागत के अधिकतम 10% तक सीमित है)।
स्टांप ड्यूटी में 100% छूट: राज्य के अधिकांश जिलों में कपड़ा उद्योग लगाने के लिए भूमि खरीदने पर 100% स्टांप शुल्क छूट मिलती है। (गौतम बुद्ध नगर में यह छूट 75% है)।
निजी टेक्सटाइल पार्क के लिए मदद: यदि कोई डेवलपर कम से कम 25 एकड़ में प्राइवेट टेक्सटाइल या अपैरल पार्क विकसित करता है, तो उसे परियोजना लागत (भूमि की लागत को छोड़कर) की 50% वित्तीय सहायता (अधिकतम ₹50 करोड़) दी जाती है।
संचालन और रोजगार प्रोत्साहन (Operational & Employment Support)रोजगार सृजन सब्सिडी (Employment Subsidy): मेगा और सुपर मेगा गारमेंटिंग इकाइयों को (गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) ₹3,200 प्रति श्रमिक प्रति माह की सब्सिडी 5 वर्षों के लिए दी जाती है।
बिजली शुल्क में छूट: उद्योगों को 100% बिजली शुल्क (Electricity Duty) की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क (PM MITRA Park) की इकाइयों को ₹2 प्रति यूनिट की अतिरिक्त बिजली सब्सिडी भी मिलती है।
इन-हाउस इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान: स्किल ट्रेनिंग सेंटर, टेस्टिंग लैब, क्वालिटी सर्टिफिकेशन लैब या अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र स्थापित करने के लिए कुल लागत की 25% सब्सिडी (अधिकतम ₹2.5 करोड़) मिलती है। युवाओं और छोटे बुनकरों के लिए विशेष योजनाएंयुवा स्वरोजगार सहायता: 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को हैंडलूम (₹5-20 लाख), पावरलूम (₹5-10 लाख), डिजाइन स्टूडियो (₹30 लाख) और एक्सपोर्ट हाउस (₹20 लाख) जैसी परियोजनाएं शुरू करने के लिए 75% तक की प्रतिपूर्ति दी जाती है।
रेशम उद्योग (Silk Industry) संवर्धन: सेरीकल्चर (रेशम कीट पालन और कताई) में ₹1 करोड़ तक के निवेश पर 15% पूंजी सब्सिडी (SC/ST उद्यमियों के लिए 20%) मिलती है।
है
कारीगर और उद्यमी अपने व्यवसाय को सरकारी योजनाओं और आगामी व्यापार संस्करणों (Exhibitions/Trade Fairs) में शामिल करने के लिए भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर बिल्कुल मुफ्त पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए सरकार का Udyam Registration Portal काम करता है, जो MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के तहत आपके व्यवसाय को पंजीकृत करता है।
पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया:
आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड (जो मोबाइल नंबर से लिंक हो)
पैन (PAN) कार्ड और व्यवसाय का बैंक खाता विवरण (सेविंग या करंट)
पंजीकरण करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया: सबसे पहले आधिकारिक सरकारी वेबसाइट Udyam Registration पर जाएं और होमपेज पर "For New Entrepreneurs" वाले विकल्प को चुनें।
आधार सत्यापन: अपना 12 अंकों का आधार नंबर और अपना नाम (जैसा आधार में दर्ज है) भरें, फिर "Validate & Generate OTP" पर क्लिक करें। आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP को दर्ज कर सत्यापित करें।
संगठन का प्रकार और पैन सत्यापन: इसके बाद अपने व्यवसाय का प्रकार (जैसे- प्रोपराइटरशिप/एकल स्वामित्व, पार्टनरशिप आदि) चुनें और अपना पैन (PAN) नंबर डालकर उसे वैलिडेट करें।
व्यवसाय का विवरण भरें: अब फॉर्म में अपने उद्योग/दुकान का नाम, प्लांट/इकाई का पता, मोबाइल नंबर, ईमेल और बैंक खाता नंबर (IFSC कोड के साथ) जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज करें।
गतिविधि का चयन (Major Activity): यहाँ आपको चुनना होगा कि आपका व्यवसाय मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) है या सर्विस (सेवा)। हस्तशिल्प और कारीगरी से जुड़े लोग मैन्युफैक्चरिंग या संबंधित सर्विस कोड को चुन सकते हैं।
निवेश और टर्नओवर: अपने व्यवसाय में लगी कुल पूंजी (इन्वेस्टमेंट) और सालाना टर्नओवर की जानकारी भरें (यह डेटा आपके आईटीआर/जीएसटी से भी ऑटो-लिंक हो जाता है)।
अंतिम सबमिशन: पूरी जानकारी जांचने के बाद "Submit and Get Final OTP" पर क्लिक करें। OTP दर्ज करते ही आपका पंजीकरण पूरा हो जाएगा।
पंजीकरण के बाद व्यापार संस्करणों (Trade Editions) के लिए लाभ
पंजीकरण पूरा होते ही आपको एक स्थायी उद्यम पंजीकरण संख्या (URN) और एक डिजिटल उद्यम प्रमाण पत्र (Udyam Certificate) मिल जाते हैं। इसके जरिए आप:सरकार द्वारा आयोजित होने वाले आगामी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों (Trade Fairs/Exhibitions) में स्टॉल बुक करने के लिए पात्र हो जाते हैं।
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए मिलने वाली सरकारी सब्सिडी, कम ब्याज पर लोन और टेंडरों में प्राथमिकता का लाभ उठा सकते हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए किसी भौतिक दस्तावेज को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होती है। आपके पास केवल ये दो विवरण होने चाहिए:




0 Comments