भारत निर्वाचन आयोग पूछा है कि नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय
मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को फ्रीज करना असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ
चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी के नाम और 'सिंबल को फ्रीज कर दिया।
कानपुर:24 सितम्बर 2026
नई दिल्ली: 24 सितम्बर 2026
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका पर 24 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से पूछा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर अंतिम फैसला लेने में उसे कितना समय लगेगा।
मुख्य बिंदु और कोर्ट का रुख:
चुनाव आयोग से समयसीमा मांगी: कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह सोमवार (28 सितंबर 2026) तक एक संभावित और उचित समयसीमा बताए कि वह इस मामले का स्थायी समाधान कब तक कर सकता है।
सुनवाई करने वाली पीठ: ममता बनर्जी की याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमालिया बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन जजों की पीठ ने सुनवाई की।
ममता बनर्जी का तर्क: याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी का मूल नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और पारंपरिक 'घास-फूल' चुनाव चिह्न को फ्रीज करना असंवैधानिक और स्थापित नियमों के खिलाफ है। आयोग को उनके दावों और तथ्यों पर पूरा भरोसा करना चाहिए था।
विवाद की पृष्ठभूमि:
यह विवाद तब शुरू हुआ जब विरोधी गुट (ऋतब्रत बनर्जी) ने मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को अवैध बताते हुए चुनाव आयोग का रुख किया। इसके बाद, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी कर पार्टी के नाम और 'घास-फूल' सिंबल को फिलहाल फ्रीज कर दिया।
आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया है, जबकि दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा (खाम)' सिंबल दिया गया है। इसी अंतरिम व्यवस्था के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार को होगी।
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