अदालत ने जाति आधारित भेदभाव से जुड़े प्रावधान अस्पष्ट संशोधन की आवश्यकता
2012 के नियम फिलहाल लागू
विद्यार्थियों के हितों पर रहेगा विशेष ध्यान
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए कर दी स्थगित
नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता तथा जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लागू किए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 नियमों को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों के विद्यार्थियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए नियमों को अधिक स्पष्ट और समावेशी बनाना है।सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या कहा?
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी रोक
2012 के नियम फिलहाल लागू
विद्यार्थियों के हितों पर रहेगा विशेष ध्यान
UGC के 2026 नियमों की समीक्षा के लिए विशेष समिति गठित करने की केंद्र सरकार की पहल उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि समिति किन सुझावों के साथ सामने आती है और नए नियमों में क्या बदलाव किए जाते हैं। इसका सीधा असर देश के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और लाखों विद्यार्थियों की शिकायत निवारण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सरकार UGC के नए नियमों पर पुनर्विचार कर रही है।
सरकार का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी भी वर्ग के विद्यार्थी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसके साथ भेदभाव हो रहा है या उसकी शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि नियम बनाते समय प्रत्येक विद्यार्थी के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। युवा पीढ़ी का कल्याण और शैक्षणिक वातावरण की निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए।
UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम अधिसूचित किए थे। इनका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों के निस्तारण के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करना था। नियमों के कुछ प्रावधानों की भाषा और उनके संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।
अदालत ने विशेष रूप से जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा से जुड़े प्रावधान को अस्पष्ट बताते हुए उसमें संशोधन की आवश्यकता जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार, 2026 के नए नियमों पर रोक रहने तक UGC के वर्ष 2012 के समानता संबंधी नियम प्रभावी रहेंगे।
नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में शिकायत निवारण व्यवस्था और विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को मिलने वाली सुरक्षा के दायरे पर सवाल उठाए गए हैं।
प्रस्तावित समिति के माध्यम से नियमों की भाषा, शिकायत निवारण व्यवस्था और सभी विद्यार्थियों के लिए समान सुरक्षा जैसे मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। अदालत ने संकेत दिया कि उच्च शिक्षण संस्थानों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने वाले शिक्षाविदों और विधि विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
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