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प्रशांत भूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कथित फर्जी वीडियो साझा करने का मामला

विदेश मंत्री को भारत की विदेश नीति और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर आलोचना करते हुए दिखाया गया था।
मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने 3 नवंबर को वायरल वीडियो को फर्जी और डिजिटल रूप से एडिट बताया
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रूसी विदेश मंत्री के नाम से प्रसारित की जा रही टिप्पणियां वास्तविक नहीं हैं।
मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी

कानपुर:4 नवम्बर 2026
नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कथित रूप से एडिट किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस वीडियो में रूसी विदेश मंत्री को भारत की विदेश नीति और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत की आलोचना करते हुए दिखाया गया था।
क्या है पूरा मामला?
प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव कथित तौर पर भारत के आंतरिक मामलों और रूस की विदेश नीति को लेकर टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे।
प्रशांत भूषण ने वीडियो के साथ भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी भी की थी। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसको लेकर विवाद शुरू हो गया।
विदेश मंत्रालय ने बताया फर्जी वीडियो
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट चेक यूनिट ने 3 नवंबर को वायरल वीडियो को फर्जी और डिजिटल रूप से एडिट किया हुआ बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रूसी विदेश मंत्री के नाम से प्रसारित की जा रही टिप्पणियां वास्तविक नहीं हैं।
रूसी दूतावास ने भी इस वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे AI से तैयार किया गया फर्जी कंटेंट बताया और लोगों से ऐसी सामग्री साझा नहीं करने की अपील की।
AI डीपफेक और सोशल मीडिया पर गलत सूचना का मुद्दा
इस पूरे विवाद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किए जा रहे डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति के वीडियो और आवाज में डिजिटल बदलाव करके ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने में वास्तविक प्रतीत होती है। इसलिए सोशल मीडिया पर किसी वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
प्रशांत भूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान वीडियो की उत्पत्ति, उसके डिजिटल संपादन और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है।एफआईआर दर्ज होना पुलिस की जांच की शुरुआत है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।रूसी विदेश मंत्री के कथित एडिटेड वीडियो को साझा करने के मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने डीपफेक और डिजिटल भ्रामक सूचनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की प्रामाणिकता जांचने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
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