भारत सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मंत्रिमंडल की 4 नवंबर 2026 की घोषणा।
प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों में वास्तविक कमी पर ध्यान रहेगा।
फैसले का उद्देश्य दुष्कर्म और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम से जुड़े मामलों का तेजी से निस्तारण
कानपुर:5 नवम्बर 2026
नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों (FTSCs) की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य दुष्कर्म और बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम से जुड़े मामलों का तेजी से निस्तारण करना है।
दुष्कर्म और POCSO मामलों की होगी तेज सुनवाई
फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों का गठन गंभीर यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से किया गया है। इन अदालतों में विशेष रूप से दुष्कर्म और बच्चों के साथ यौन शोषण से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाती है।
अदालतों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निस्तारण में मदद मिलने और पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
पीड़ितों को मिलेगा त्वरित न्याय
दुष्कर्म और बाल यौन अपराधों के मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण पीड़ितों और उनके परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ने से सुनवाई की प्रक्रिया को गति देने में सहायता मिल सकती है।
न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
सरकार का यह कदम महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों का हिस्सा है। हालांकि, अदालतों की संख्या बढ़ाने के साथ पर्याप्त न्यायाधीशों, कर्मचारियों, अभियोजन व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।
फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने की मंजूरी यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में एक अहम पहल है। अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों में वास्तविक कमी पर ध्यान रहेगा।
योजना पर कितना बजट खर्च होगा?
केंद्र सरकार ने इस योजना को अगले पांच वर्षों यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 3,788.04 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
केंद्र सरकार का हिस्सा: 2,353.15 करोड़ रुपये।
राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्सा: 1,434.89 करोड़ रुपये।
प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
योजना का संचालन न्याय विभाग संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से करेगा।
अब तक 4 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2019 में योजना शुरू होने के बाद से इन विशेष अदालतों द्वारा दुष्कर्म और POCSO अधिनियम से जुड़े 4,02,457 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में यह योजना 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित है।
वेबसाइट के लिए महत्वपूर्ण तथ्य: अदालतों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ न्यायाधीशों की नियुक्ति, पर्याप्त संसाधन और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। तभी पीड़ितों को इस योजना का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
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