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नई दिल्ली से बड़ी खबर: पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधिंया नियंत्रण विधेयक, 2026 पुनर्विचार के लिए वापस

“एंटी‑गुंडा बिल” का उद्देश्य असामाजिक गतिविधियों को रोकने और नियंत्रित करने का कानूनी ढांचा तैयार करना
राज्य सरकार को संशोधन कर दोबारा विधानसभा में पेश करना होगा और  राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी।
बिल में अधिकतम 12 महीने तक कानूनी अभिरक्षा का   प्रावधान है।

कानपुर:25 सितम्बर 2026
नई दिल्ली: 25 सितम्बर 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों नियंत्रण विधेयक, 2026 (जिसे ‘एंटी‑गुंडा बिल’ कहा जा रहा है) को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है।
केंद्र की आपत्ति
केंद्र ने बिल की धारा 2(d)(iii)(b) पर आपत्ति जताई है, जिसमें NDPS Act, 1985 के तहत अपराधों को “गुंडा” की परिभाषा में शामिल किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह प्रावधान Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988 के तहत पहले से मौजूद preventive detention व्यवस्था से टकरा सकता है।
केंद्र ने सुझाव दिया है कि NDPS Act का उल्लेख हटाया जाए ताकि Article 254 के तहत repugnancy (कानूनी टकराव) की स्थिति न बने।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार आवश्यक संशोधन कर सकती है और बिल को दोबारा विधानसभा में पेश कर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज सकती है।
बिल की मुख्य बातें
“एंटी‑गुंडा बिल” का उद्देश्य असामाजिक गतिविधियों को रोकने और नियंत्रित करने का कानूनी ढांचा तैयार करना है।
इसमें शामिल अपराध:
भय या असुरक्षा फैलाना
जीवन/संपत्ति को गंभीर खतरा
सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना
अवैध कब्जा और संपत्ति को नुकसान
अवैध खनन, रेत उत्खनन, वन‑उत्पाद और वन्यजीव अपराध
“गुंडा” की परिभाषा में वे लोग शामिल हैं जो आदतन अपराध करते हैं, उकसाते हैं, वित्तपोषण करते हैं या NDPS Act, Arms Act, Immoral Traffic Act, Explosive Substances Act आदि के तहत आरोपित हैं।
बिल में अधिकतम 12 महीने तक की preventive detention का प्रावधान है।
विपक्ष और अदालत
विपक्ष ने आशंका जताई थी कि इस कानून का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है।
CM सुवेंदु अधिकारी ने आश्वासन दिया था कि कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होगा।
6 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने दो PIL खारिज कर दिए थे, यह कहते हुए कि राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले चुनौती देना समयपूर्व है।
वर्तमान स्थिति
राष्ट्रपति द्वारा बिल लौटाए जाने के बाद अब राज्य सरकार को संशोधन कर इसे दोबारा विधानसभा में पेश करना होगा और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी।

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