चेयरमैन वी. नारायणन: "लोग आते-जाते रहते हैं, परियोजनाएँ प्रभावित नहीं होंगी।
पलायन जारी तो ISRO की दीर्घकालिक परियोजनाएँ प्रभावितकानपुर: जुलाई 16, 2026
बेंगलूरु:
लगभग 100 ISRO वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस्तीफा दिया है, जिससे सरकार चिंतित हो गई है। 14 जुलाई 2026 को जारी मेमो में कहा गया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को अब सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।मुख्य तथ्य
इस्तीफे की संख्या: 100–120 वैज्ञानिकों ने हाल के महीनों में इस्तीफा दिया है।
प्रभावित केंद्र:
UR Rao Satellite Centre (URSC), बेंगलुरु → लगभग 80 इस्तीफे।
Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), तिरुवनंतपुरम → लगभग 20 इस्तीफे।
प्रमुख नाम: LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ और SpaDeX प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने भी इस्तीफा दिया।
सरकारी कदम:
सभी इस्तीफे अब सीधे Department of Space (DoS) को भेजे जाएंगे।
गगनयान, चंद्रयान-4, मंगलयान-2 और प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे रोकने की कोशिश।
सरकार की चिंता
मिशन पर असर: गगनयान (भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन) और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञता का नुकसान: वर्षों से तैयार की गई तकनीकी विशेषज्ञता अचानक खत्म होने का खतरा।
निजी क्षेत्र का आकर्षण: भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ बेहतर वेतन और अवसर मिलने से वैज्ञानिक पलायन कर रहे हैं।
ISRO का आधिकारिक रुख
चेयरमैन वी. नारायणन: उन्होंने कहा कि "लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन परियोजनाएँ प्रभावित नहीं होंगी।"
मेमो का उद्देश्य: इस्तीफों को रोकना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना कि महत्वपूर्ण परियोजनाएँ अचानक बाधित न हों।
संभावित जोखिम
मानव संसाधन संकट: यदि पलायन जारी रहा तो ISRO की दीर्घकालिक परियोजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
निजी क्षेत्र बनाम सरकारी संस्थान: निजी कंपनियों में बेहतर अवसर मिलने से सरकारी संस्थानों में प्रतिभा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
राष्ट्रीय महत्व: गगनयान और चंद्रयान जैसे मिशन भारत की वैश्विक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक हैं, जिन पर असर पड़ना देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है।




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