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मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996: वैकल्पिक विवाद समाधान का प्रमुख कानून

कुल 4 भागों (Parts) और 14 अनुसूचियों (Schedules) में विभाजित
भाग 1: मध्यस्थता
भाग 2: विदेशी पंचाटों का प्रवर्तन
भाग 3: सुलह
भाग 4: अनुपूरक प्रावधान
कानपुर: 14 जून 2026
मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act, 1996) भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) का एक प्रमुख कानून है। इस अधिनियम को इसकी संपूर्णता और स्पष्टता के लिए कुल 4 भागों (Parts) और 14 अनुसूचियों (Schedules) में विभाजित किया गया है।
अधिनियम के मुख्य भाग (Parts of the Act)
यहाँ चारों भागों की विस्तृत जानकारी दी गई है
भाग 1: मध्यस्थता (Arbitration)
यह भाग मुख्य रूप से घरेलू मध्यस्थता (Domestic Arbitration) से संबंधित है। लागू होना: यह भाग केवल तब लागू होता है जब मध्यस्थता का स्थान भारत के भीतर हो।
धाराएं: इसमें धारा 2 से 43 तक शामिल हैं।
मुख्य विषय: मध्यस्थता करार (धारा 7), मध्यस्थों की नियुक्ति (धारा 11), और मध्यस्थता पंचाट (Arbitral Award) का समापन या उसे रद्द करना (धारा 34) इसके प्रमुख हिस्से हैं।
भाग 2: विदेशी पंचाटों का प्रवर्तन (Enforcement of Certain Foreign Awards)
यह भाग अंतर्राष्ट्रीय विवादों और विदेशी निर्णयों को भारत में लागू करने से जुड़ा है। लागू होना: यह भाग विदेशी मध्यस्थता निर्णयों की मान्यता और प्रवर्तन से संबंधित है।
धाराएं: इसमें धारा 44 से 60 तक शामिल हैं।
मुख्य विषय: इसमें न्यूयॉर्क कन्वेंशन (New York Convention) और जिनेवा कन्वेंशन (Geneva Convention) के तहत आने वाले फैसलों को भारतीय न्यायालयों द्वारा मान्यता देने के नियम दिए गए हैं।
भाग 3: सुलह (Conciliation)
यह भाग विवादों के मैत्रीपूर्ण समाधान (amicable settlement) के लिए एक गैर-बाध्यकारी प्रक्रिया प्रदान करता है। लागू होना: यह भाग किसी भी ऐसे विवाद पर लागू होता है जो मध्यस्थता या सुलह के दायरे में आता हो।
धाराएं: इसमें धारा 61 से 81 तक शामिल हैं।
मुख्य विषय: सुलहकर्ता (Conciliator) की नियुक्ति, सुलह कार्यवाही की शुरुआत, और पक्षों के बीच समझौता समझौता (Settlement Agreement) तैयार करने के नियम इसमें बताए गए हैं।
भाग 4: अनुपूरक प्रावधान (Supplementary Provisions)
यह भाग अधिनियम के सामान्य और प्रशासनिक कामकाज से संबंधित है। धाराएं: इसमें धारा 82 से 90 तक शामिल हैं।
मुख्य विषय: यह न्यायालयों को नियम बनाने की शक्ति देता है और बताता है कि अधिनियम को लागू करने के लिए प्रक्रिया कैसे तय होगी।

आप विस्तृत और आधिकारिक कानूनी भाषा के लिए India Code या Indian Kanoon पर अधिनियम का मूल दस्तावेज़ देख सकते हैं।

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