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वसीयत रहित मकान (या संपत्ति) का बंटवारा: उत्तर प्रदेश

बिना वसीयत संपत्ति (मकान, जमीन आदि) Class I वारिसों में बराबर बंटती है।
बंटवारा दो तरीके
A. आपसी सहमति से (सबसे अच्छा और सस्ता तरीका)
B. सहमति न हो तो कोर्ट से
कानपुर: 12 जून 2026
वसीयत रहित मकान (या संपत्ति) का बंटवारा
1. कानून क्या कहता है? (Hindu Succession Act, 1956)भारत में हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध परिवारों में यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत मर जाता है, तो उसकी संपत्ति (मकान, जमीन आदि) Class I वारिसों में बराबर बंटती है।Class I वारिस (समान हिस्सा):
  • पत्नी (विधवा)
  • पुत्र
  • पुत्री
  • माता (अगर जीवित हो)
पूर्व मृत पुत्र/पुत्री के बच्चे (उनकी शाखा को एक हिस्सा)उदाहरण:पत्नी + 1 बेटा + 1 बेटी → 3 बराबर हिस्से (प्रत्येक को 1/3)
पत्नी + 2 बेटे + 1 बेटी → 4 बराबर हिस्से (पत्नी को 1/4)
अगर माता भी जीवित हो → हिस्से और बढ़ जाते हैं।नोट: 2005 के संशोधन के बाद बेटी को बेटे के बराबर अधिकार है (पैतृक संपत्ति में जन्म से कोपार्सनर)।मुस्लिम/ईसाई/पारसी परिवारों के लिए अलग कानून लागू होते हैं।2. बंटवारा कैसे करें? (दो तरीके)A. आपसी सहमति से (सबसे अच्छा और सस्ता तरीका)सभी वारिस मिलकर Partition Deed (बंटवारा दस्तावेज) तैयार करें।
इसमें मकान के स्पष्ट हिस्से (माप, सीमा) लिखें।
रजिस्ट्रेशन करवाएं (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में)।
उत्तर प्रदेश में नया नियम (2025-26): पैतृक/पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे पर फ्लैट ₹5,000 स्टांप ड्यूटी + ₹5,000 रजिस्ट्रेशन (कुल ₹10,000 तक)। पहले 4-7% तक लगता था।B. सहमति न हो तो कोर्ट सेकोई भी वारिस Partition Suit (बंटवारा मुकदमा) दायर कर सकता है।
सिविल कोर्ट में केस चलेगा।
कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर मकान का बंटवारा करवाएगा (शारीरिक विभाजन या बिक्री + पैसे बांटना)।
यह समय लेने वाला (कई साल) और महंगा होता है।
मकान अगर स्व-अर्जित था या पैतृक, दोनों में नियम थोड़े अलग हो सकते हैं।
बंटवारा होने के बाद अलग-अलग हिस्सों पर अलग नामांतरण (म्यूटेशन) करवाएं।3. जरूरी दस्तावेजमृतक का डेथ सर्टिफिकेट
वारिस प्रमाण पत्र (तहसील से)
मकान के पुराने दस्तावेज (खरीद डीड, रजिस्ट्री, म्यूटेशन)
परिवार के संबंध प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र, आधार आदि)
Partition Deed (अगर आपसी सहमति हो)

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